पंजाब पुलिस ने चीनी हैंडलर्स से जुड़े म्यूल अकाउंट गिरोह का भंडाफोड़ किया, तीन गिरफ्तार

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चंडीगढ़, 20 मार्च (आईएएनएस)। पंजाब पुलिस की राज्य साइबर अपराध शाखा ने एक बड़े साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह धोखाधड़ी से कमाए गए पैसों को चीनी नागरिकों तक पहुंचाने के लिए ‘म्यूल अकाउंट’ यानी किराए के बैंक खाते उपलब्ध कराता था। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों ने पिछले दो सालों में जाली दस्तावेजों से खोले गए चालू खातों के जरिए कमीशन के रूप में लगभग 50 लाख रुपए कमाए हैं।

पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देश पर राज्य को साइबर अपराधों से मुक्त और सुरक्षित बनाने के अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम गुरजीत सिंह, रमन राय और सुखदेव सिंह हैं। ये सभी फाजिल्का जिले के जलालाबाद के रहने वाले हैं। ये लोग मोहाली के फेज 5 में किराए के एक कमरे से ‘ब्रदर ट्रेडर्स’ नाम की नकली फर्म चलाते थे। इस फर्म के नाम पर वे साइबर ठगों को चालू बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, जिन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है।

म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसका इस्तेमाल अपराधी अवैध पैसों को इधर-उधर करने, छिपाने या वैध दिखाने के लिए करते हैं। अक्सर ये खाते आम लोगों के नाम पर जाली दस्तावेजों से खोले जाते हैं या लालच देकर लोगों से खाते किराए पर लिए जाते हैं। इस गिरोह ने ठगी के पैसों को विदेश भेजने या क्रिप्टोकरेंसी में बदलने में मदद की। जांच में पता चला कि आरोपी टेलीग्राम ऐप के जरिए सीधे चीनी नागरिकों से संपर्क में थे। वे खाते उपलब्ध कराने के बदले मुनाफा यूएसडीटी नाम की क्रिप्टोकरेंसी में लेते थे।

पुलिस ने छापेमारी के दौरान गिरोह से जुड़े बैंक खातों में जमा करीब 20 लाख रुपए फ्रीज कर दिए। इसके अलावा 23 एटीएम कार्ड, दो लैपटॉप, सात मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड, जाली बैंक और केवाईसी दस्तावेज, 14 चेक बुक, उद्योग प्रमाण पत्र और छह मुहरें जब्त की गईं। साथ ही 5100 अमेरिकी डॉलर मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी भी बरामद हुई।

स्पेशल डीजीपी साइबर क्राइम वी. नीरजा ने बताया कि यह कार्रवाई ‘घरेलू हॉटस्पॉट’ के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। जांच से पता चला कि ये म्यूल अकाउंट 24 साइबर ठगी पीड़ितों से जुड़े थे। इन खातों में कुल 26.65 लाख रुपए की राशि को कानूनी रोक लगाकर सुरक्षित कर लिया गया है। पुलिस अब बरामद एटीएम कार्डों की जांच कर रही है, ताकि और पीड़ितों का पता लगाया जा सके और पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

इस मामले में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत 17 मार्च 2026 को एफआईआर संख्या 16 दर्ज की गई है। जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि गिरोह के और सदस्यों तथा विदेशी कनेक्शन का पता लगाया जाएगा।

पंजाब पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहें। किसी को भी अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम या पासबुक न दें। संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक पर क्लिक न करें और पैसे ट्रांसफर न करें। शक होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें। पुलिस साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है ताकि राज्य में डिजिटल सुरक्षा मजबूत हो और नागरिक सुरक्षित रहें।