Thursday, July 30, 2026
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अमित शाह से देशद्रोही ताकतें डरती हैं’, राहुल गांधी के बयान पर भाजपा सांसदों का तीखा पलटवार

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नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के कई सांसदों ने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताते हुए उनके रवैये, संसदीय भाषा और विपक्ष की राजनीति पर सवाल उठाए।

भाजपा सांसदों ने कहा कि राहुल गांधी छात्रों के मुद्दों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं और सदन में तथ्यात्मक चर्चा के बजाय भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह किसी से डरने वाले नेता नहीं हैं। अमित शाह डरते नहीं हैं, बल्कि आप (राहुल गांधी) उनसे डरते हैं। अमित शाह ऐसे व्यक्ति हैं जिनसे देशद्रोही ताकतें, आतंकवादी, नक्सलवादी और देश को टुकड़े-टुकड़े करने की साजिश करने वाले लोग डरते हैं। अगर कोई डर रहा है तो वह राहुल गांधी हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अमित शाह को जनता के जनादेश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वास के आधार पर गृह मंत्री बनाया गया है। जब तक देश की जनता भाजपा को समर्थन देती रहेगी और प्रधानमंत्री मोदी उन्हें गृह मंत्री बनाए रखेंगे, तब तक राहुल गांधी के किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।

भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने राहुल गांधी की संसदीय भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पांच बार सांसद रहने के बावजूद उन्हें यह समझ नहीं है कि संसद में किन शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत छात्रों के मुद्दे से की, लेकिन बाद में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिनका सदन में विरोध हुआ।

जायसवाल ने कहा कि यदि राहुल गांधी अपनी बात रखना चाहते थे तो वे संसदीय मर्यादा के अनुरूप शब्दों का चयन कर सकते थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर विवादित भाषा का इस्तेमाल किया।

भाजपा सांसद तरुण चुघ ने राहुल गांधी पर छात्रों के भविष्य को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में छात्रों की वास्तविक समस्याओं के समाधान पर कोई ठोस सुझाव नहीं दिया, बल्कि केवल भ्रम फैलाने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि छात्रों के हितों की चिंता करने के बजाय कांग्रेस नेता राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी लगातार असंसदीय और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है।

इसी दौरान तरुण चुघ ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संत रविदास नगर का नाम बहाल करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने संत रविदास के नाम पर रखे गए जिले का नाम बदल दिया था, जबकि संत रविदास ने भक्ति आंदोलन के माध्यम से समानता, सामाजिक न्याय और जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ महत्वपूर्ण योगदान दिया। समाजवादी पार्टी ने हमेशा देश के महान संतों का अपमान किया है।

भाजपा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने भी राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें अपने राजनीतिक रवैये में बदलाव लाने की आवश्यकता है। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में नेता प्रतिपक्ष का दायित्व केवल आरोप लगाना नहीं, बल्कि तथ्यों और विश्लेषण के साथ मुद्दों को उठाना भी है। उनके अनुसार राहुल गांधी बिना किसी आधार के आरोप लगाते हैं और जब विस्तार से अपनी बात रखने का अवसर मिलता है तो वे विषय से भटक जाते हैं।

शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि राहुल गांधी के भाषण की शुरुआत लगा कि वे युवाओं और नीट पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा करेंगे। लेकिन इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक उस विषय पर कोई चर्चा नहीं की और ऐसे मुद्दे उठाए जिनका मौजूदा विषय से कोई सीधा संबंध नहीं था। इससे सदन और देश दोनों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई।

भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने आरोप लगाया कि पिछले दो सप्ताह से राहुल गांधी लगातार सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष के पास कोई मुद्दा है तो उसे तथ्यों और तर्कों के साथ सदन में उठाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस ने नीट मामले पर चर्चा की मांग की, फिर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की और अब अमित शाह पर गोली चलवाने जैसे आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं। कांग्रेस गैर-मुद्दों को मुद्दा बनाकर जनता में असंतोष पैदा करने की कोशिश कर रही है।

भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने भी कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं और वहां प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं हुई हैं, वहां कांग्रेस ने कभी संबंधित शिक्षा मंत्रियों के इस्तीफे की मांग नहीं की।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भी कई पेपर लीक हुए, लेकिन उस समय पार्टी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से समझा है और उनकी अपील के बाद छात्रों ने अपना प्रदर्शन भी समाप्त कर दिया। उनके अनुसार देश के छात्रों का विश्वास प्रधानमंत्री मोदी पर है, राहुल गांधी पर नहीं।

भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, “उन्हें माफ़ी मांगनी होगी। आप इस तरह झूठ नहीं फैला सकते और किसी पर इतने गंभीर आरोप नहीं लगा सकते।”

बता दें कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्र आंदोलन और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की और दावा किया कि दिल्ली पुलिस तथा सुरक्षा बलों ने छात्रों के खिलाफ कार्रवाई और कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल गृह मंत्री के आदेश पर किया था।