लखनऊ, 29 जुलाई (आईएएनएस)। यूपी भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने ‘वंदे मातरम’ से जुड़े कानून, एंटी-पेपर लीक बिल, लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण, अखिलेश यादव की टिप्पणी, कांवड़ यात्रा को लेकर एआईएमआईएम नेताओं के बयानों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राष्ट्रहित, छात्रों के भविष्य और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर स्पष्ट नीति के साथ काम कर रही है।
‘वंदे मातरम’ से जुड़े कानून पर राकेश त्रिपाठी ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा का प्रतीक है। इसी गीत को गाते हुए अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया था। देश के भीतर कुछ ऐसे तत्व हैं जो राष्ट्रगीत को धार्मिक नजरिए से जोड़कर उसका अपमान करने की कोशिश करते हैं। इसी कारण संसद ने इस विषय में कठोर कानून बनाया है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति राष्ट्रगीत का अपमान करने का दुस्साहस न कर सके।
एंटी-पेपर लीक बिल पर भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि लंबे समय से छात्र परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की मांग कर रहे थे। पहले से मौजूद कानून को और अधिक कठोर बनाकर केंद्र सरकार ने यह संदेश दिया है कि प्रतिभा, योग्यता और मेहनत के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। जो लोग पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल होंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणी पर राकेश त्रिपाठी ने कहा कि विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी एक संवैधानिक और जिम्मेदार पद पर हैं, लेकिन उनके भाषण में गंभीरता और तथ्यात्मकता का अभाव दिखाई देता है। संसद में बोलते समय तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए, जबकि राहुल गांधी की भाषा और भाव-भंगिमा संसदीय गरिमा के अनुरूप नहीं थी। राहुल गांधी बार-बार ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं जो संसदीय परंपराओं के अनुकूल नहीं है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा राहुल गांधी का समर्थन करने और छात्रों पर बल प्रयोग के आरोपों पर राकेश त्रिपाठी ने कहा कि निर्दोष छात्रों पर किसी प्रकार का बल प्रयोग नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने हिंसा फैलाने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया था। दिल्ली पुलिस की जांच में ऐसे कई लोगों की पहचान हुई है, जिन पर कार्रवाई की जा रही है। लाठीचार्ज या आंसू गैस छोड़ने जैसे निर्णय किसी मंत्री या सरकार द्वारा नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और मजिस्ट्रेट की अनुमति से कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए लिए जाते हैं।
नीट आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मामलों और सरकार के रुख पर राकेश त्रिपाठी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि निर्दोष छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भी इसी पक्ष में है। यदि किसी ऐसे छात्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है जिसकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है और जिसने किसी गैरकानूनी गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया, तो ऐसी कार्रवाई समाप्त की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यार्थी का भविष्य बर्बाद नहीं होना चाहिए।
कांवड़ यात्रा को लेकर एआईएमआईएम नेताओं की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सावन का महीना वर्ष में एक बार आता है और कांवड़ यात्रा भारतीय सनातन परंपरा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है। इसके लिए प्रशासन पहले से निर्धारित मार्ग तय करता है। सुरक्षा और यातायात की पूरी व्यवस्था की जाती है। जिस प्रकार अन्य धार्मिक आयोजनों, ताजिया जुलूसों और उर्स जैसे कार्यक्रमों के लिए भी प्रशासनिक व्यवस्था और मार्ग निर्धारित किए जाते हैं, उसी प्रकार कांवड़ यात्रा के लिए भी व्यवस्थाएं की जाती हैं। एआईएमआईएम और कुछ अन्य विपक्षी दल जानबूझकर ऐसे बयान देकर समाज में भ्रम और तनाव पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय सभी पक्षों को सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की दिशा में काम करना चाहिए।

