लखनऊ, 3 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और कला साधकों को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रदेश सरकार 5 जून को विभिन्न विधाओं के 51 प्रतिष्ठित कलाकारों को सम्मानित करेगी। राजभवन के गांधी सभागार में आयोजित होने वाले समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल कलाकारों को अकादमी पुरस्कार, सफदर हाशमी पुरस्कार और बी.एम. शाह पुरस्कार से अलंकृत करेंगी।
सम्मान प्राप्त करने वाले कलाकारों को संस्कृति विभाग की ओर से विशिष्ट श्रेणी में शामिल किया जाएगा तथा विभागीय कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने पर उन्हें 70 हजार रुपए तक मानदेय मिलेगा। यह जानकारी प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को पर्यटन भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक परंपरा देश की सबसे समृद्ध विरासतों में से एक है और प्रदेश के कलाकारों ने संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक संगीत तथा लोकनाट्य के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार राज्य का प्रतिष्ठित सांस्कृतिक सम्मान है। इस सम्मान से विभूषित अनेक कलाकार बाद में पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे राष्ट्रीय सम्मानों से भी सम्मानित हो चुके हैं। अकादमी विगत छह दशकों से भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रही है।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2021 से 2024 तक के लंबित अकादमी पुरस्कारों का वितरण एक साथ किया जाएगा। इनमें शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, वादन, नृत्य, नाट्य लेखन, रंगमंच निर्देशन, अभिनय और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े कलाकार शामिल हैं। साथ ही रंगकर्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों को सफदर हाशमी और बी.एम. शाह पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जाएगा।
जयवीर सिंह ने बताया कि वर्ष 1970-71 से अकादमी पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं और वर्ष 2020 तक 510 कलाकारों को यह सम्मान मिल चुका है। उन्होंने कहा कि संस्कृति विभाग कलाकारों के आर्थिक और रचनात्मक सशक्तीकरण के लिए लगातार कार्य कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभाग द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और प्रस्तुतियों के लिए कलाकारों को लगभग 14 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। वर्तमान में विभाग के पोर्टल पर करीब 17 हजार कलाकार पंजीकृत हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी 75 जनपदों में गुरु-शिष्य परंपरा के तहत ग्रीष्मकालीन कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही नवोदित कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने के लिए ‘नवांकुर योजना’ संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से युवा प्रतिभाओं को प्रदर्शन के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रदेश की लोक और पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। इसके लिए विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी लोककलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए भी विशेष योजनाएं संचालित की जा रही हैं, ताकि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और अधिक सशक्त हो सके।

