Wednesday, May 27, 2026
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राजगीर मलमास मेले में पहला शाही स्नान, साधु-संत और श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

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राजगीर, 27 मई (आईएएनएस)। आध्यात्मिक और ऐतिहासिक शहर बिहार के राजगीर में मलमास मेले में बुधवार को पहला शाही स्नान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के माहौल में संपन्न हुआ। पुरुषोत्तमी एकादशी एवं स्वार्थ सिद्धि योग के पावन संयोग पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में शाही स्नान की शुरुआत हुई, जो दोपहर तक चली। शाही स्नान में विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों, महंतों और देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

जिला प्रशासन के अनुसार, इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। शाही स्नान को लेकर मंगलवार की रात से ही राजगीर में श्रद्धालुओं और साधु-संतों का आगमन शुरू हो गया था। सुबह ब्रह्मकुंड और अन्य पवित्र कुंडों के आसपास श्रद्धालुओं की लंबी कतारें रही। श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्गों से कतारबद्ध कर कुंडों तक पहुंचाया गया।

मेले में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए। सभी प्रमुख स्नान स्थलों, मार्गों और मेला क्षेत्र में पुलिस बल, दंडाधिकारी तथा स्वयंसेवकों की तैनाती की गई। प्रत्येक अखाड़े के साथ एक मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई, ताकि शाही स्नान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

शाही स्नान की विधिवत शुरुआत उदासीन अखाड़े के संतों द्वारा की गई। इसके बाद विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों के साधु-संत पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, ध्वज-पताका और जयघोष के साथ स्नान यात्रा में शामिल हुए। इस भव्य आयोजन में खाक चौक, बड़ी संगत, धनियां पहाड़ी संगत, रजौली संगत, कैलाश आश्रम, कबीर पंथी, फलाहारी बाबा संप्रदाय तथा सखी संप्रदाय के झुनकिया बाबा समेत कई अखाड़ों के महंत और संत भाग लिए।

शाही स्नान को लेकर जिला प्रशासन ने साधु-संतों के लिए विशेष व्यवस्था की। अखाड़ों के साधु-संतों के जत्थों को निर्धारित रेड कॉरिडोर से होकर सीधे ब्रह्मकुंड तक पहुंचाया गया। साधु-संतों के शाही स्नान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आम श्रद्धालुओं के लिए ब्रह्मकुंड परिसर को खोला गया।

परंपरा के अनुसार, साधु-संतों का पहला स्नान गुरुनानक कुंड में हुआ। इसके बाद संतों का जत्था सरस्वती नदी, सप्तधारा होते हुए मुख्य ब्रह्मकुंड पहुंचा, जहां पवित्र स्नान और विशेष पूजा-अर्चना के साथ अनुष्ठान संपन्न किया गया।

स्नान के दौरान श्रद्धालुओं ने भी पवित्र कुंडों में आस्था की डुबकी लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और मंगलकामना की।

राजगीर मलमास मेले का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व देशभर में विशेष माना जाता है। मान्यता है कि मलमास के दौरान 33 करोड़ देवी-देवता राजगीर में निवास करते हैं और यहां के पवित्र गर्म जलकुंडों में स्नान करने से मनुष्य के पापों का नाश होता है तथा उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के कारण हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

15 जून तक चलने वाले इस मेले में राजगीर के 22 पवित्र गर्म जलकुंडों और 52 धाराओं में स्नान का विशेष महत्व है। इस दौरान तीन शाही स्नान समेत कई धार्मिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मेले में बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल and श्रीलंका जैसे देशों से भी साधु-संत एवं श्रद्धालु पहुंचे हैं।