रांची, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। झारखंड के ऐतिहासिक शक्तिपीठ रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर में शारदीय नवरात्र के पहले दिन रविवार को भव्य अनुष्ठान और दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया है। सुबह से ही यहां देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। माता के दर्शन के साथ-साथ यहां नवरात्र उपासना और तांत्रिक साधना के लिए झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा से बड़ी संख्या में साधक-उपासक पहुंचे हैं।
मान्यताओं के अनुसार, असम के प्रख्यात कामाख्या मंदिर के बाद रजरप्पा का यह धाम देश का दूसरा सबसे जागृत और रहस्यमयी शक्तिपीठ माना जाता है। यह पावन स्थल दामोदर और भैरवी (भोरही) नदियों के नैसर्गिक संगम तट पर स्थित है। धार्मिक दृष्टिकोण से इस संगम का अत्यंत विशिष्ट महत्व है, जहां दामोदर नदी पुरुष स्वरूप (नद) के रूप में प्रवाहित होती है और भैरवी के साथ मिलकर ‘काम’ और ‘रति’ के प्रतीक का सृजन करती है।
इसी त्रिकोण संगम स्थल पर योनि यंत्र की आधारशिला पर लगभग छः हजार साल पुराना मां छिन्नमस्तिका का मुख्य मंदिर स्थापित है। मंदिर के मुख्य पुजारी शुभाशीष पंडा बताते हैं कि सनातन धर्म की दस महाविद्याओं में से एक मां छिन्नमस्तिका देवी का यह अत्यंत रौद्र और शक्तिशाली स्वरूप है। मंदिर के गर्भगृह में उत्तरी दीवार के पास रखे शिलाखंड पर दक्षिण की ओर मुख किए माँ छिन्नमस्तिका की दुर्लभ प्रतिमा उत्कीर्ण है, जिसमें देवी अपना कटा मस्तक स्वयं अपने हाथों में धारण किए हुए हैं।
रजरप्पा में केवल मुख्य मंदिर ही नहीं, बल्कि एक विस्तृत आध्यात्मिक परिसर है। यहां छिन्नमस्तिका मंदिर के अलावा महाकाली मंदिर, सूर्य मंदिर, दस महाविद्या मंदिर (अष्ट मंदिर), बाबा धाम मंदिर, बजरंगबली मंदिर, शंकर मंदिर और विराट रूप मंदिर सहित कुल सात प्रमुख मंदिर स्थित हैं। इन मंदिरों में आज नवरात्र के पहले दिन विशेष पूजा-अर्चना, हवन और घटस्थापना के अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न किए जा रहे हैं।
नवरात्र के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मंदिर न्यास समिति और जिला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। मंदिर प्रक्षेत्र और आसपास के घाटों पर पुलिस बल के जवानों की तैनाती की गई है, ताकि दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
