नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को सपा, राजद, झामुमो और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव समेत सांसदों ने श्रीराम मंदिर चढ़ावा में कथित गड़बड़ी, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने, छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि विपक्ष जनता की आस्था और आर्थिक हितों से जुड़े हर मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर उठाता रहेगा।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा से जुड़ा मामला लोगों की धार्मिक आस्था से संबंधित है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकार ने अब तक ऐसी स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि मौजूदा वाहन ई-20 या भविष्य में प्रस्तावित ई-30 और ई-40 ईंधन के उपयोग के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं।
उन्होंने मांग की कि ऑटोमोबाइल कंपनियां इस संबंध में स्पष्ट प्रमाणन दें, अन्यथा लोगों पर ऐसे ईंधन के उपयोग का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य राम मंदिर चढ़ावा में कथित गड़बड़ी, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने तथा अन्य महत्वपूर्ण जनसरोकार के मुद्दों को उठाना है।
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया और राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारी चंपत राय पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। हालांकि, उनके आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
पप्पू यादव ने भारतीय जनता पार्टी की सांसद बांसुरी स्वराज पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर उन्हें पहले संसदीय प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था।
उन्होंने यह भी कहा कि वह हिंसा में विश्वास नहीं करते और प्रयागराज की अदालत द्वारा भेजे गए नोटिस का विधिक प्रक्रिया के तहत जवाब देंगे।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद संजय यादव ने कहा कि राम मंदिर के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में कथित गड़बड़ी का मामला अत्यंत गंभीर है। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार किसी धार्मिक उद्देश्य या भगवान के नाम पर एकत्रित धन का दुरुपयोग या चोरी बड़ा पाप माना जाता है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने झारखंड से जुड़े एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे ही कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तत्काल जिम्मेदार लोगों के इस्तीफे सुनिश्चित किए। उन्होंने कहा कि झारखंड सीआईडी लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियां कर रही है तथा सरकार मामले की गंभीरता से जांच करा रही है।
महुआ माजी ने छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि केंद्रीय गृह मंत्री संसद में उपस्थित होकर छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल जैसे आरोपों पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करें। उनके अनुसार, पूरे देश की निगाहें इस मुद्दे पर सरकार के जवाब का इंतजार कर रही हैं।

