नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)।समाजवादी पार्टी के सांसदों ने गुरुवार को संसद भवन के बाहर अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद के मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन किया। सपा सांसदों का आरोप है कि सरकार सदन में चर्चा नहीं कर रही है और इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना चाहिए। पार्टी नेताओं ने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मामले में सदन में जवाब दें। इसके साथ ही सपा सांसदों ने झारखंड में छात्रों के आंदोलन, प्रयागराज में कांग्रेस के ‘स्टूडेंट्स की गूंज’ सहित कई मुद्दों पर बात की।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झारखंड देश का एक महत्वपूर्ण राज्य है और पूरा विपक्ष छात्रों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि छात्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली पांच सदस्यीय समिति राज्य सरकार से मिलने वाली है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री की ओर से क्या जवाब और आश्वासन दिया जाता है, यह बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा, इसलिए फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
सपा सांसद आनंद भदौरिया ने पार्टी की पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की अवधारणा को लेकर कहा कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा ब्राह्मण समाज को सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लखनऊ में छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्रा की जयंती मनाई गई, जो इस बात का प्रतीक है कि पार्टी सभी वर्गों का सम्मान करती है।
उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पीडीए में दबे-कुचले, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, महिलाएं, समाजवादी विचारधारा से जुड़े सवर्ण और आदिवासी सभी शामिल हैं।
प्रयागराज में कांग्रेस के ‘स्टूडेंट्स की गूंज’ कार्यक्रम की अनुमति रद्द किए जाने को लेकर सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती कि छात्र कहीं भी अपनी आवाज उठाएं या किसी कार्यक्रम का आयोजन करें। उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी छात्रों के मुद्दों पर किसी भी तरह की चर्चा से बचना चाहती है लेकिन अब छात्र और विपक्ष दोनों इन मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी धर्मेंद्र यादव ने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2024 का लोकसभा चुनाव नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अपनी उपलब्धि बताकर लड़ा था। ऐसे में यदि वही कानून सरकार का अपना है, तो अब नए विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष पहले भी इस प्रस्ताव के पीछे की मंशा पर सवाल उठा चुका है और आज भी सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए धर्मेंद्र यादव ने कहा कि यदि किसी भी ब्राह्मण परिवार से बात की जाए तो वह बताएगा कि मौजूदा राज्य सरकार के कार्यकाल में सबसे अधिक नुकसान ब्राह्मण समाज को हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार करने में विफल रही है।
संसद की कार्यवाही को लेकर सपा सांसद इकरा हसन ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूरे मानसून सत्र के दौरान सदन केवल एक दिन ही ठीक से चल पाया है और सदन को सुचारु रूप से चलाना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष से वादा किया गया था कि पुलिस की कथित बर्बरता और अत्याचार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी, सरकार जवाब देगी और विपक्ष को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है।
इकरा हसन ने पीडीए की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए कहा कि यह केवल पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमें महिलाएं, आदिवासी, सवर्ण समाज के वंचित वर्ग, पंडित और वे सभी लोग शामिल हैं जो सरकार की विचारधारा से असहमत हैं या स्वयं को उपेक्षित महसूस करते हैं। उनके अनुसार पीडीए एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक मंच है।
सपा सांसद अक्षय यादव ने परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पार्टी परिसीमन के वर्तमान प्रस्ताव का विरोध करती है। उनका आरोप था कि यदि महिलाओं के अधिकारों की सबसे बड़ी विरोधी कोई पार्टी है तो वह भाजपा है। उन्होंने छात्राओं के आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या नेता को लोकतांत्रिक तरीके से कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मिलनी चाहिए और प्रशासन का दायित्व सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
वहीं, सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने प्रयागराज में कांग्रेस के कार्यक्रम की अनुमति रद्द होने पर सरकार को तानाशाही मानसिकता वाला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है और उसकी कोशिश है कि कोई भी सरकार के खिलाफ अपनी बात न रख सके।

