रांची, 31 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड से राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने शुक्रवार को राज्यसभा में रांची स्थित केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (सीआईपी) को संसद के पृथक अधिनियम के जरिए राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि 108 वर्ष पुराने इस संस्थान को वैधानिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार को समयबद्ध पहल करनी चाहिए।
शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए डॉ. वर्मा ने कहा कि वर्ष 1918 में स्थापित सीआईपी देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल है। यह संस्थान मानसिक रोगों के उपचार के साथ-साथ मनोचिकित्सा, नैदानिक मनोविज्ञान, मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्य, नर्सिंग, पुनर्वास, तंत्रिका विज्ञान और जन-मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि संस्थान में हर वर्ष 1.17 लाख से अधिक मरीजों का इलाज होता है, जिनमें करीब 80 प्रतिशत मरीज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत को देखते हुए सीआईपी को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बनाने की आवश्यकता है।
डॉ. वर्मा ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ‘एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया-2024’ रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024 में देश में 1,70,746 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। इनमें 52,910 दिहाड़ी मजदूर, 22,113 गृहिणियां, 17,886 स्वरोजगार से जुड़े लोग, 16,905 वेतनभोगी और पेशेवर, 14,778 बेरोजगार, 14,488 विद्यार्थी, 12,811 निजी क्षेत्र के कर्मचारी, 11,015 व्यवसायी और 10,546 कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल थे।
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य का संकट समाज के लगभग हर वर्ग को प्रभावित कर रहा है। सांसद ने सदन को बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 148वीं रिपोर्ट ‘मेंटल हेल्थ केयर एंड इट्स मैनेजमेंट इन कंटेम्पररी टाइम्स’ में भी सीआईपी को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने की सिफारिश की है।
डॉ वर्मा ने सीआईपी और रिनपास की भूमि का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार दोनों संस्थानों के पास वर्तमान में कुल 552.23 एकड़ भूमि दर्ज है, जबकि पुराने गजट और भूमि अभिलेखों में 891.532 एकड़ भूमि का उल्लेख है। उन्होंने दोनों आंकड़ों के बीच 339.302 एकड़ भूमि के अंतर की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि संसद पूर्व में निमहांस और एम्स जैसे संस्थानों को अलग कानून बनाकर राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दे चुकी है। इसी तर्ज पर सीआईपी, रांची को भी राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित कर उसे मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षण, प्रशिक्षण, अनुसंधान और रोगी देखभाल के क्षेत्र में व्यापक स्वायत्तता प्रदान की जानी चाहिए।

