धनबाद, 12 मई (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हैदराबाद में दिए गए बयान का समर्थन किया और विपक्ष के बयानों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति हर नागरिक को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।
मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा, “देश के नागरिक होने के नाते हमारा भी अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्य है। हम देख रहे हैं कि युद्धों के कारण दुनिया भर में किस तरह की समस्याएं पैदा हो रही हैं। दुनिया के कई देशों में संकट की स्थिति है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने उस संकट को भारत तक नहीं पहुंचने दिया। इसके बावजूद पीएम ने देशवासियों से अपील की है कि वे खर्च में कटौती करें, जो कई तरीकों से की जा सकती है। हम भी ऐसा करने के बारे में सोच रहे हैं। लोग इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, हमें जितना हो सके कम यात्रा करनी चाहिए और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना चाहिए।”
वहीं, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि भारत लगातार प्रगति की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ हमारे सामने कई चुनौतियां भी हैं, जिन्हें हमें मिलकर पार करना होगा। पीएम मोदी ने देशवासियों से सात विनम्र आग्रह किए हैं। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें अपने दैनिक जीवन में उनका पालन सुनिश्चित करना चाहिए।
दूसरी ओर, पीएम मोदी की अपील पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल दी जाती है।
विपक्ष के बयानों पर यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, “राहुल गांधी और अखिलेश यादव को अब समझ लेना चाहिए कि आप दोनों की मानसिकता नकारात्मक हो चुकी है, फिर चाहे मुद्दा राष्ट्रहित का ही क्यों न हो। पीएम मोदी ने देशहित में देशवासियों से कुछ समय के लिए सीमित संसाधनों का उपयोग करने की विनम्र अपील की, लेकिन नकारात्मक मानसिकता से ग्रसित इन दोनों नेताओं की राजनीतिक कुंठा, हताशा और निराशा सामने आ गई। उन्होंने अनर्गल बयानबाजी शुरू कर दी।”
पीएम मोदी ने देशवासियों से अपनी अपील की है कि एक साल तक सोना खरीदने से बचें। पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए मेट्रो से सफर करें। पार्सल रेल के जरिए भेजें और कार का कम इस्तेमाल करें। खाने के तेल का कम उपयोग करें। रासायनिक खाद का इस्तेमाल आधा करें और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें। विदेशी ब्रांडेड उत्पादों का उपयोग कम करें, स्वदेशी अपनाएं और एक साल तक विदेश यात्राएं कम करें। जहां तक संभव हो, ऑफिस में वर्चुअल मीटिंग करें और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दें।

