Tuesday, July 28, 2026
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रीढ़ की मजबूती से हार्मोन संतुलन तक, मारीच्यासन के नियमित अभ्यास के फायदे

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नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। योग शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है। इनमें वर्णित मारिच्य योगासन शरीर का लचीलापन बढ़ाने, पेट के अंगों की मालिश करने और रिब-केज खोलकर श्वसन क्षमता में सुधार करने में मदद करता है।

संस्कृत के शब्द ‘मारीचि’ (जो ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और सूर्य वंश के प्रणेता महर्षि मारीचि का नाम है) और ‘आसन’ (यानी स्थिति या मुद्रा) से मिलकर ‘मारीच्यासन’ बना है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को लेकर गाइडलाइन जारी किए हैं। उनके अनुसार, मारीच्यासन एक बैठकर किया जाने वाला ट्विस्टिंग आसन है, जो रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने, पाचन में सुधार करने और मधुमेह के प्रबंधन में सहायक है।

इसके नियमित अभ्यास से शरीर के कई अंग स्वस्थ रहते हैं। यह आसन अधिवृक्क (एड्रिनल) ग्रंथियों और अग्न्याशय (पैंक्रियास) को सक्रिय करने में मदद करता है, जिससे हार्मोन का स्राव बेहतर होता है। यह आसन प्रजनन तंत्र की कार्यप्रणाली को भी बेहतर बनाता है। इससे श्रोणि (पेल्विक) क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ता है और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है और शरीर में ऊर्जा तथा स्फूर्ति का अनुभव होता है।

इस आसान को करना बेहद आसान है। इसका अभ्यास करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं। अब अपना दाहिना घुटना मोड़ें और बाएं हाथ को दाहिनी जांघ के बाहर रखें। सांस को छोड़ते हुए दाईं ओर मुड़ें और पीछे की तरफ देखें। संभव हो, तो हाथों को पीठ के पीछे पकड़ें। 5-10 गहरी सांसें लेकर दूसरी तरफ दोहराएं। शुरुआत में आसन को धीरे-धीरे और योग शिक्षक की देखरेख में करें। सांस पर पूरा ध्यान दें, जल्दबाजी न करें।

हालंकि, गंभीर पीठ दर्द या चोट होने पर, पेट की हालिया सर्जरी और गर्भवती महिलाओं समेत कई लोगों, गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों को अभ्यास करने से बचना चाहिए या फिर डॉक्टर की सलाह पर करना चाहिए।

इसके अभ्यास से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं, लेकिन योग करने के साथ-साथ संतुलित आहार ग्रहण करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सही खान-पान पाचन को दुरुस्त रखता है, मन को शांत करता है और शारीरिक-मानसिक शुद्धि में मदद करता है।