Sunday, August 23, 2026
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‘रिफॉर्म एक्सप्रेस बिना रिफॉर्म के’, खड़गे ने बजट को बताया खाली, राहुल बोले- जरूरी मुद्दे नजरअंदाज

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नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय बजट 2026 को लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने मोदी सरकार पर जुबानी हमला किया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बजट को देश की वास्तविक समस्याओं से कटा हुआ बताते हुए सरकार पर नीति-विहीनता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का आरोप लगाया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार के पास अब कोई आइडिया नहीं बचा है। बजट 2026 भारत की कई आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का एक भी समाधान नहीं देता है। ‘मिशन मोड’ अब ‘चैलेंज रूट’ बन गया है। ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ शायद ही किसी ‘रिफॉर्म’ जंक्शन पर रुकती है। नतीजा: कोई पॉलिसी विजन नहीं, कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं।

खड़ने ने कहा, “हमारे अन्नदाता किसान अभी भी सार्थक कल्याणकारी सहायता या आय सुरक्षा योजना का इंतजार कर रहे हैं। असमानता ब्रिटिश राज के समय के स्तर से भी आगे निकल गई है, लेकिन बजट में इसका जिक्र तक नहीं है और न ही एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और अल्पसंख्यक समुदायों को कोई सहायता दी गई है। वित्त आयोग की सिफारिशों का और अध्ययन करना होगा, लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वे गंभीर वित्तीय तनाव से जूझ रही राज्य सरकारों को कोई राहत देंगी। संघवाद इसका शिकार हो गया है।”

खड़गे ने बजट की खामियों को गिनाते हुए कहा कि मैन्युफैक्चरिंग में कोई रिवाइवल रणनीति नहीं। 13 फीसदी पर अटकी हुई है। ‘मेक इन इंडिया’ कहां है? उन्होंने सवाल किया कि हमारे युवाओं के लिए रोजगार या वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कोई गंभीर योजना नहीं। पिछली इंटर्नशिप और कौशल विकास योजनाओं का क्या नतीजा निकला? निर्यात में गिरावट, टैरिफ जोखिम, व्यापार घाटा, घटते वैश्विक हिस्से पर कोई जवाब नहीं। गिरते रुपए के लिए कोई योजना है? महंगाई से कोई राहत नहीं। बचत घट रही है, कर्ज बढ़ रहा है, मजदूरी स्थिर है। उपभोक्ता मांग को फिर से शुरू करने का कोई आइडिया क्यों नहीं?

उन्होंने कहा कि विश्वास का कोई संकेत नहीं – एफडीआई और मजदूरी में ठहराव को नजरअंदाज किया गया। सिर्फ छोटे-मोटे बदलाव क्यों, कोई संरचनात्मक सुधार क्यों नहीं? उन्होंने बुनियादी ढांचा को लेकर कहा कि वादे दोहराए गए, डिलीवरी गायब – शहर अभी भी रहने लायक नहीं हैं। हमारे पास ‘स्मार्ट सिटी’ या रहने लायक शहर कब होंगे? सामाजिक सुरक्षा और कल्याण पर एक भी महत्वपूर्ण घोषणा नहीं हुई। बजट में मनरेगा की जगह लेने वाले नए कानून के लिए आवंटन पर एक भी शब्द नहीं है। यह बजट कोई समाधान नहीं देता, यहां तक कि पॉलिसी की कमी को छिपाने के लिए नारे भी नहीं हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में युवा बेरोजगार हैं, मैन्युफैक्चरिंग गिर रही है, निवेशक पूंजी बाहर निकाल रहे हैं, घरेलू बचत तेजी से घट रही है और किसान संकट में हैं। वैश्विक स्तर पर आने वाले झटकों का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन बजट इन सभी मुद्दों को नजरअंदाज करता है।

उन्होंने कहा कि यह ऐसा बजट है जो पाठ्यक्रम सुधार (कोर्स करेक्शन) से इनकार करता है और भारत के असली संकटों के प्रति अंधा बना हुआ है।