Wednesday, May 27, 2026
SGSU Advertisement
Home अंतर्राष्ट्रीय रिपब्लिकन सांसद ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठाए सवाल

रिपब्लिकन सांसद ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठाए सवाल

0
6

वाशिंगटन, 27 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान खुद को शांति दूत के तौर पर स्थापित करने में जुटा है। अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थ की जिम्मेदारी उठा रहा है। इस बीच अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम ने ही पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब्राहम अकॉर्ड के हवाले से इस्लामाबाद की नीयत को कठघरे में खड़ा किया है।

एक्स पर उन्होंने पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का एक साल पुराना पोस्ट टैग करते हुए कहा कि बतौर मध्यस्थ उन्हें शुरू से ही पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा, “एक मीडिएटर के तौर पर पाकिस्तान बहुत बड़ी प्रॉब्लम है।”

रिपब्लिकन ग्राहम के अनुसार, पाकिस्तान का इजरायल के प्रति पुराना विरोध, नकारात्मक रुख और ईरानी सैन्य विमानों को पाकिस्तानी एयरबेस पर जगह देने की खबरें चिंता बढ़ाने वाली हैं।

पोस्ट के जरिए ग्राहम ने कहा कि पाकिस्तान को राष्ट्रपति ट्रंप को जल्द जवाब देना चाहिए कि अब्राहम अकॉर्ड्स (समझौते) में शामिल होगा या नहीं।

उन्होंने लिखा, “अब्राहम अकॉर्ड्स को लेकर डिफेंस मिनिस्टर की टिप्पणी एक साल पुरानी है। जिसमें उनका स्पष्ट मत था कि पाकिस्तान कभी शामिल नहीं होगा क्योंकि उन्हें इजरायल पर भरोसा नहीं है। यह क्लिप एक साल पुरानी हो सकती है, लेकिन मुझे डर है कि यह भावना अभी भी जस की तस है।”

अब्राहम समझौता एक अहम कूटनीतिक समझौता है, जिसके तहत इजरायल और कुछ अरब देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश की गई। इसकी शुरुआत सितंबर 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुई थी। समझौते का मकसद मध्य पूर्व में शांति और सहयोग को बढ़ाना है, ताकि इजरायल और अरब देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सीधा संपर्क और सहयोग बन सके।

इस पहल के तहत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन ने सबसे पहले इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित किए। इसके बाद सूडान और मोरक्को भी इस प्रक्रिया से जुड़े।

“अब्राहम” नाम इसलिए चुना गया क्योंकि यह यहूदी, ईसाई और इस्लाम तीनों धर्मों में साझा माने जाने वाले पैगंबर इब्राहिम से जुड़ा है, जो आपसी भाईचारे और शांति का प्रतीक माना जाता है।

हाल के वर्षों में अमेरिका ने, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल और उसके बाद की कूटनीतिक चर्चाओं में, सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे देशों को भी इस समझौते में शामिल करने की कोशिशें तेज की हैं। हालांकि, अब तक इन देशों ने इजरायल को मान्यता देने से इनकार ही किया है।