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रेवंत रेड्डी के बयान पर सियासी घमासान, भाजपा बोली-देश को बांटने की कोशिश, कांग्रेस ने किया बचाव

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नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के एक बयान ने देश की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने भगवान शिव और भगवान राम को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा था कि भगवान शिव गरीबों के देवता हैं और भगवान राम अमीरों के देवता हैं। साथ ही, उन्होंने सवाल उठाया था कि भाजपा नेता ‘जय श्री राम’ का नारा तो लगाते हैं लेकिन ‘हर हर महादेव’ क्यों नहीं बोलते। उनके इस बयान के बाद भाजपा से लेकर बीआरएस तक ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, वहीं कांग्रेस ने पलटवार किया है।

तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने रेवंत रेड्डी के बयान को हिंदू समुदाय को बांटने की साजिश बताया। उन्होंने कहा, “भगवान राम और भगवान शिव को लेकर रेवंत रेड्डी का बयान हिंदू समुदाय को बांटने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं है। वह सोनिया गांधी और राहुल गांधी के कहने पर ऐसा बोल रहे हैं क्योंकि वे दोनों जाति, क्षेत्र, उत्तर-दक्षिण और अब देवताओं के नाम पर देश को बांट रहे हैं। हम इसकी निंदा करते हैं।”

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने भी कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “जब भी आप सोचते हैं कि कांग्रेसियों की सोच इससे नीचे नहीं हो सकती है, कांग्रेसी आपको हर बार गलत साबित करते हैं और उससे भी नीचे चले जाते हैं। भगवानों को तो छोड़ दीजिए। अब भगवानों में भी आप बताएंगे कि कौन किसका है। यह तो शुक्र है कि भगवान की जाति इन्होंने नहीं बताई।”

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने रेवंत रेड्डी पर निशाना साधते हुए कहा, “रेवंत रेड्डी को कुछ नहीं पता। शबरी कौन थीं, जिन्होंने भगवान राम को बेर खिलाए थे? मुझे लगता है कि उन्हें यह भी नहीं पता कि केवट कौन थे। रेवंत रेड्डी वही व्यक्ति हैं जो कहा करते थे कि अगर मुसलमानों की कोई पार्टी है, तो वह कांग्रेस पार्टी है। जो लोग तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं, वे हमें इस पर लेक्चर देंगे? उन्हें ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है।”

वहीं, बीआरएस ने भी रेवंत रेड्डी के बयान की आलोचना की है। हैदराबाद में बीआरएस के प्रवक्ता दिनेश चौधरी ने कहा, “निश्चित रूप से रेवंत रेड्डी के बयानों को उनके आदर्श के तौर-तरीकों को अपनाने के तौर पर देखा जा सकता है। सभी जानते हैं कि उन्होंने खुलकर कहा था कि हिटलर उनके आदर्श हैं, जिनकी नीति ‘फूट डालो और राज करो’ की थी। अब, वे धर्म और क्षेत्र के आधार पर देवताओं के बीच भी बंटवारा करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और हर किसी को अपने धर्म का पालन करने की आजादी है। हमने कभी नहीं देखा कि देवताओं में क्षेत्र, सामाजिक स्थिति या किसी और चीज के आधार पर कोई फर्क किया गया हो। रेवंत रेड्डी का इस तरह के बयान देना और भगवान राम और भगवान शिव के बीच दरार पैदा करने की कोशिश करना उनकी नासमझी या अज्ञानता को दिखाता है।”

उधर, कांग्रेस ने रेवंत रेड्डी का बचाव किया है और भाजपा पर ही भगवान के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। दिल्ली में कांग्रेस नेता मधु याक्षी गौड़ ने कहा, “भाजपा ही वह पार्टी है जिसने भगवान के नाम पर बंटवारा करके राजनीतिक फायदा उठाया है। आज भाजपा ने ही भगवान राम के नाम पर इकट्ठा किए गए चंदे को चुराया है। जो लोग भगवान के नाम पर चंदा इकट्ठा करते हैं और उसे चुराते हैं, उन्हें हमसे सवाल पूछने का क्या हक है? सबसे पहले आपको देश को जवाब देना चाहिए। ‘जय श्री राम’ का मुद्दा उठाकर आपने जो पैसा इकट्ठा किया, उससे राम मंदिर के उद्घाटन के समय आपने पूरे देश में चावल बांटे। तो राजनीति आप लोग कर रहे थे, हम नहीं। हमारे मुख्यमंत्री यह साबित करना चाहते हैं कि भाजपा इतनी नीचे गिर गई है कि सत्ता में आने के लिए भगवान का भी इस्तेमाल करती है।”