Monday, June 29, 2026
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100 साल पुरानी इमारत में चल रहा सरकारी विद्यालय, कई स्थानों पर आई दरार, छत से टपकता है पानी

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करौली, 29 जून (आईएएनएस)। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सोमवार से राजस्थान के करौली जिले के सरकारी विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो गई। पहले ही दिन अधिकांश स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति अपेक्षा से काफी कम रही। वहीं कई विद्यालयों में जर्जर भवनों के बीच कक्षाएं संचालित होने से विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पिछले वर्ष बारिश के दौरान प्रदेशभर में स्कूल भवनों की जर्जर स्थिति सामने आने के बाद आपदा प्रबंधन के तहत करौली जिले के 737 विद्यालयों की मरम्मत के लिए प्रति विद्यालय दो लाख रुपए की स्वीकृति दी गई थी। इनमें 281 विद्यालयों की मरम्मत शिक्षा विभाग तथा 456 विद्यालयों की मरम्मत पंचायती राज विभाग के माध्यम से कराई जानी थी। लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जिले के कई विद्यालयों में मरम्मत कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है।

जिला मुख्यालय स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय करीब 100 वर्ष पुरानी इमारत में सचालित किया जा रहा है। इस इमारत में कई स्थानों पर चौड़ी दरारें, झड़ता प्लास्टर और कमजोर छतें विद्यार्थियों के लिए खतरा बनी हुई हैं। दो वर्ष पहले बारिश के दौरान भवन का एक हिस्सा ढह गया था, लेकिन आज तक उसका पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है।

विद्यालय के प्रधानाचार्य मिथिलेश कुमार शर्मा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि भवन की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी। बजट के अभाव में दो क्षतिग्रस्त कमरों की छत हटाकर जनसहयोग से टीनशेड लगाकर अस्थायी व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान अत्यधिक जर्जर कमरों को बंद कर दिया जाता है, जबकि जगह की कमी के कारण कई बार एक ही कक्ष में तीन-तीन कक्षाओं की छात्राओं को बैठाना पड़ता है। टीनशेड वाले कमरों में भी बारिश के समय पानी टपकने से पढ़ाई प्रभावित होती है।

करौली सेकेंडरी के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) इंद्रेश तिवाड़ी ने बताया कि जिन विद्यालयों के भवन जर्जर हैं, उनके निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया जारी है। पहले भी कई भवनों का निर्माण कराया जा चुका है और शेष कार्य जल्द पूरा कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन विद्यालयों में नामांकन कम हुआ है, वहां छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ अब अभिभावकों और विद्यार्थियों को उम्मीद है कि विद्यालयों की आधारभूत समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा और सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी।