बंगाल चुनाव: सबांग सीट पर टीएमसी के दिग्गज नेता की हार, भाजपा के अमल कुमार पांडा जीते

0
3

नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की सबांग विधानसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार अमल कुमार पांडा ने जीत दर्ज की है। इस सीट से टीएमसी के वरिष्ठ नेता और ममता सरकार में मंत्री रहे मानस रंजन भुइयां को हार का सामना करना पड़ा।

भाजपा के उम्मीदवार अमल कुमार पांडा को जहां 1,27,783 वोट मिले, वहीं ममता सरकार में मंत्री और वरिष्ठ टीएमसी नेता मानस रंजन भुइयां को 1,16,647 वोट मिले। उन्हें 11,136 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। तीसरे स्थान पर सीपीआई (एम) के नकुल चंद्र बेरा रहे तो वहीं चौथे स्थान पर कांग्रेस के अलक कुमार रहे।

सबांग विधानसभा सीट पर पहले चरण में 23 अप्रैल को मतदान हुआ था और बड़ी संख्या में लोगों ने इस मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।

सबांग विधानसभा सीट पर 2026 के चुनाव में कई प्रमुख उम्मीदवार मैदान में रहे। तृणमूल कांग्रेस ने राज्य के वरिष्ठ नेता और मंत्री मानस रंजन भुइयां को उम्मीदवार बनाया था। भारतीय जनता पार्टी ने अमल कुमार पांडा को मैदान में उतारा था।

वाम मोर्चे की ओर से सीपीआई (एम) ने नकुल चंद्र बेरा को प्रत्याशी बनाया था, जबकि कांग्रेस ने अलक कुमार समाई पर दांव लगाया था। इसके अलावा एसयूसीआई (सी) से तपन कुमार ससमल, आमरा बंगाली से देबाशीष बर्मन और कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में रहे।

पश्चिम बंगाल की सबांग विधानसभा सीट पश्चिम मेदिनीपुर जिले की अहम राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है। ग्रामीण प्रभाव वाली यह सीट राज्य की चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल है और यहां का चुनावी मुकाबला अक्सर दिलचस्प रहता है। सबांग विधानसभा सीट घाटल लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इस संसदीय क्षेत्र से फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के दीपक अधिकारी (देव) सांसद हैं।

सबांग विधानसभा सीट का गठन वर्ष 1951 में हुआ था। यह पश्चिम बंगाल की पुरानी विधानसभा सीटों में शामिल है। हालांकि 1967 से 1977 के बीच यह सीट कुछ समय के लिए चुनावी मानचित्र से बाहर रही, लेकिन बाद में फिर बहाल कर दी गई। 2006 की परिसीमन प्रक्रिया के बाद इसका वर्तमान स्वरूप तय हुआ।

सबांग सीट पर सबसे लंबे समय तक कांग्रेस का दबदबा रहा है। इस सीट पर अब तक सबसे अधिक बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। 1951 से लेकर 2011 तक कांग्रेस यहां कई बार विजयी रही और मानस रंजन भुइयां इस सीट के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। 1982, 1987, 1991, 2006 और 2011 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की।

बाद में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने 2021 में भी यह सीट जीती। इस लिहाज से ऐतिहासिक रूप से सबांग सीट पर कांग्रेस का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक रहा है, जबकि हाल के वर्षों में तृणमूल कांग्रेस ने यहां अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।