नई दिल्ली, 24 अगस्त (आईएएनएस)। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े आर्थिक अभियान की तैयारी कर ली है। इस अभियान का मकसद ईरान के आर्थिक संसाधनों और वित्तीय रास्तों को बंद कर उसे आर्थिक रूप से अलग-थलग करना है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी कमजोर कर दिया है, उसकी लगभग सभी सैन्य उत्पादन सुविधाओं को नष्ट कर दिया है और उसके परमाणु कार्यक्रम को गंभीर झटका पहुंचाया है। अब हम इस संघर्ष के निर्णायक चरण में पहुंच रहे हैं। अब एक तरह का आर्थिक ‘डी-डे’ शुरू होगा, यह किसी दुश्मन के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक हमला है।”
बेसेंट ने कहा कि इस्लामिक गणराज्य ईरान लंबे समय से सुरक्षा की गारंटी के नाम पर दबाव बनाकर अपने हित साधता रहा है। उसकी ताकत इस सोच से आती रही कि ईरान जवाबी कार्रवाई जरूर करेगा, जबकि अमेरिका के कदमों को बातचीत के जरिए प्रभावित किया जा सकता है। लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अब वह दौर खत्म हो चुका है। जो लोग तेहरान का विरोध करने से डरते हैं, उन्हें वॉशिंगटन की ताकत को भी कम नहीं आंकना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने ऐसी परिस्थितियां बना दी हैं, जिनसे सरकार की हर एजेंसी, हर कानूनी अधिकार और ऐसे कदमों का इस्तेमाल किया जा सके, जिनके बारे में कई लोगों को लगता था कि उन्हें कभी लागू नहीं किया जाएगा।
इस अभियान का उद्देश्य उन सभी आर्थिक रास्तों और संसाधनों को बंद करना है जो ईरान की सरकार को सहारा देते हैं, ताकि अंततः तेहरान आर्थिक रूप से अलग-थलग पड़ जाए।
ट्रंप ने बुधवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा था कि ईरान को समर्थन देने वाले किसी भी देश के खिलाफ ‘अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई’ की जाएगी। उन्होंने कहा, “यह अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा।” ट्रंप ने इस कदम को ‘आर्थिक डी-डे” बताया।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इन बयानों के जवाब में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है, तो एक भी बूंद तेल का निर्यात नहीं होगा, न होर्मुज स्ट्रेट के जरिए और न ही पर्शियन गल्फ के किसी अन्य हिस्से से। ईरान, ईरानी जनता के खिलाफ अमेरिका के आर्थिक युद्ध में किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई मानेगा।”

