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सच्चा व्यक्ति बलिदानी महापुरुषों के प्रति किए गए उपकार को कभी नहीं भूलते, पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित

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नई दिल्ली, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बलिदानी महापुरुषों के प्रति किए गए उपकार को कभी नहीं भूलने का संदेश देते हुए सुभाषित साझा किया है।

प्रधानमंत्री मोदी की ओर से एक्स पर संस्कृत श्लोक “प्रथमवयसि पीतं तोयमल्पं स्मरन्तः शिरसि निहितभारा नारिकेला नराणाम्। ददति जलमनल्पास्वादमाजीवितान्तं न हि कृतमुपकारं साधवो विस्मरन्ति॥” साझा किया गया है। इस श्लोक का अर्थ है कि जिस प्रकार नारियल का वृक्ष अपने प्रारम्भिक अवस्था में प्राप्त थोड़े से जल के उपकार को जीवनभर स्मरण रखता है और अपने सिर पर भार सहते हुए भी मनुष्यों को मधुर जल प्रदान करता रहता है, उसी प्रकार सच्चे उदात्त व्यक्ति-विशेषतः बलिदानी महापुरुषों के प्रति किए गए उपकार को कभी नहीं भूलते। वे उनके त्याग, तप और समर्पण के प्रति गहन कृतज्ञता रखते हुए अपने जीवन को उनके आदर्शों के अनुरूप समर्पित कर उस उपकार के प्रति सदा कृतज्ञ रहा करते हैं।

यह श्लोक हमें कृतज्ञता का महान गुण सिखाता है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी समय किए गए किसी भी नेक कार्य को स्नेहपूर्वक याद रखें, कृतज्ञता महसूस करें और बदले में स्वयं भी कोई नेक कार्य करें। ऐसे गुण का विचार मात्र ही मन को कोमल और विस्तृत बना देता है।

यह वास्तव में एक नेक हृदय का संकेत है। एक नेक व्यक्ति अपने प्रति किए गए किसी भी परोपकारी कार्य को कभी नहीं भूलता। इस श्लोक का पाठ करने से हृदय मर्मस्पर्शी हो जाता है और कृतज्ञता का भाव उत्पन्न होता है।

प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया संस्कृत का एक प्रसिद्ध सुभाषित है जो ‘सुभाषितरत्नभाण्डागारम्’ ग्रंथ से लिया गया है। यह ग्रन्थ मुख्य रूप से 6 से 7 प्रकरणों (अध्यायों) में विभाजित है। इनमें मङ्गलाचरण, सामान्य प्रकरण, राज प्रकरण, चित्र प्रकरण, अन्योक्ति प्रकरण और नवरस प्रकरण शामिल हैं। सप्तम प्रकरण ‘संकीर्णक’ है।

इस ग्रंथ में काव्य, नाटक, चम्पू, भाण, प्रहसन, पुराण, इतिहास और विभिन्न आख्यायिकाओं से हजारों (लगभग 10,000 से अधिक) सुभाषितों को विषय क्रमानुसार संकलित किया गया है।