Friday, August 21, 2026
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सैयद शाहिद हाकिम: भारतीय फुटबॉल का बड़ा नाम, 1960 ओलंपिक में किया था देश का प्रतिनिधित्व

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नई दिल्ली, 22 जून (आईएएनएस)। फुटबॉल दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल है, लेकिन भारत में इस खेल को अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर वाली प्रसिद्धी नहीं मिली है। सरकारी उपेक्षा का शिकार फुटबॉल देश में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। फुटबॉल की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा खराब हुई है, लेकिन पहले भी इस खेल की स्थिति आदर्श नहीं थी। इसके बावजूद सैयद शाहिद हाकिम जैसे खिलाड़ियों ने इस खेल को जिंदा रखा है।

सैयद शाहिद हाकिम का नाम उन खिलाड़ियों में लिया जाता है, जिन्होंने अपने दौर में भारतीय फुटबॉल को जिंदा रखने में अपनी पूरी ऊर्जा एक खिलाड़ी और प्रशिक्षक के तौर पर लगाई।

सैयद शाहिद हाकिम का जन्म 23 जून, 1939 को हैदराबाद में हुआ। शाहिद को फुटबॉल खेलने की प्रेरणा अपने पिता सैयद अब्दुल रहीम से मिली। अब्दुल रहीम भी अपने दौर के बेहतरीन फुटबॉलर रहे थे और फॉरवर्ड के तौर पर खेलते थे। शाहिद ने अपने पिता से ही फुटबॉल की बारीकियां सीखीं और इस खेल में करियर बनाने का निर्णय लिया।

शाहिद 1960 में रोम ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे थे। उस समय उनके पिता ही भारतीय टीम के कोच थे। टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा और वह ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी। फिर भी भारत ने फ्रांस के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ खेलकर अपनी छाप छोड़ी थी।

राष्ट्रीय टीम के अलावा शाहिद घरेलू फुटबॉल में सर्विसेज की तरफ से खेले। सर्विसेज की ओर से खेलते हुए उन्होंने प्रतिष्ठित संतोष ट्रॉफी जीती थी। भारतीय वायु सेना की टीम का भी उन्होंने प्रतिनिधित्व किया।

बतौर खिलाड़ी संन्यास लेने के बाद इंटरनेशनल रेफरी भी बने। उन्होंने 1988 में एएफसी एशियन कप में अंपायरिंग की। हालांकि, सैयद शाहिद हाकिम को एक खिलाड़ी से ज्यादा फुटबॉल कोच के रूप में सफलता मिली। वह भारतीय टीम के सहायक कोच रहे थे। बतौर कोच उन्होंने भारतीय फुटबॉल को कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए। घरेलू फुटबॉल में वह महिंद्रा यूनाइटेड, सालगांवकर और बंगाल मुंबई के कोच रहे।

भारतीय फुटबॉल में एक खिलाड़ी और प्रशिक्षक के तौर सैयद शाहिद हाकिम के योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2017 में खेल क्षेत्र के सर्वोच्च पुरस्कार ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया था। वह द्रोणाचार्य लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से भी सम्मानित हुए।

82 वर्ष की अवस्था में सैयद शाहिद हाकिम का निधन 22 अगस्त, 2021 को कलबुर्गी, कर्नाटक में हुआ था।