संभल, 10 सितंबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत याचिका खारिज होने, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी और मस्जिद-मदरसे को नोटिस दिए जाने के मुद्दे पर भाजपा सरकार और अधिकारियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मौलाना तौकीर रजा खान की जमानत खारिज होना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और अब उनके पास आगे कानूनी रास्ता अपनाने का विकल्प है।
समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि सरकार ने एक साजिश के तहत मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ लंबी कार्रवाई की है। उनका परिवार, शुभचिंतक और समर्थक उनकी जमानत के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले कानूनी रास्ते में उन्हें राहत मिल सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 12 हजार रुपये किए जाने के फैसले पर भी बर्क ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मानदेय बढ़ाने में 10 साल का समय लग गया और इसे पहले ही बढ़ाया जा सकता था। बर्क ने आरोप लगाया कि चुनाव के समय यह फैसला लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और शिक्षा मित्रों का मानदेय और बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया जाना चाहिए।
मस्जिद, मदरसा और कब्रिस्तान से जुड़े मामलों में नोटिस जारी किए जाने को लेकर बर्क ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अधिकारी न्यायपालिका की भूमिका नहीं निभा सकते और हर कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की जानी चाहिए।
सपा सांसद ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार का ध्यान रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसे मुद्दों से हटकर मस्जिद, मदरसा और कब्रिस्तान पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि केवल मुसलमानों को परेशान करके राजनीतिक जीत हासिल करने की कोशिश सफल नहीं होगी।
सहारनपुर की मस्जिद का जिक्र करते हुए बर्क ने कार्रवाई को गलत बताया और कहा कि संभल, मुरादाबाद समेत अन्य जगहों पर नोटिस देकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी ने गलत तरीके से कार्रवाई की तो आने वाले समय में उनके खिलाफ अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।
बर्क ने कहा कि दोषी अधिकारियों को सजा दिलाने तक वह पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने सवाल किया कि किसी मस्जिद को गिराने से आखिर किसी व्यक्ति को रोजगार मिला या उसकी आर्थिक स्थिति सुधरी? उन्होंने सरकार से विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे वास्तविक जनहित के मुद्दों पर ध्यान देने की मांग की।
