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संघ प्रचारक से 3 बार प्रधानमंत्री बनने तक का सफर, जानिए नरेंद्र मोदी के संघर्ष और सफलता की कहानी

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नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ। 2014 से लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा दे रहे नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर एक साधारण स्वयंसेवक से विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता तक का सफर है।

नरेंद्र मोदी ने अपने बचपन में चाय बेचने में अपने पिता की मदद की और बाद में अपना खुद का स्टाल चलाया। आठ वर्ष की आयु में वे आरएसएस से जुड़े, जिसके साथ एक लम्बे समय तक सम्बन्धित रहे। जीवन की आरंभिक कठिनाइयों ने उन्हें न सिर्फ कठोर परिश्रम के मूल्य की समझ दी बल्कि इसके साथ ही आम लोगों की पीड़ा समझने का मौका भी दिया। उन्होंने छोटी उम्र से ही देशभक्त संस्थाओं के साथ काम कर अपने आपको देश सेवा में समर्पित कर दिया।

17 वर्ष की आयु में उन्होंने संपूर्ण भारत की यात्रा करने के लिए घर छोड़ दिया। दो वर्षों तक उन्होंने विभिन्न संस्कृतियों का पता लगाने के लिए भारत के विशाल भूखंड की यात्रा की। जब वे घर लौटे तब वे एक अलग ही व्यक्ति थे, जिसे यह स्पष्ट पता था कि उन्हें जीवन में कौन-सा लक्ष्य हासिल करना है। वे अहमदाबाद चले गए और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए। 1972 में अहमदाबाद में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रचारक बन गए।

1980 के दशक में संघ में अलग-अलग जिम्मेदारियां लेते हुए नरेंद्र मोदी अपने संगठन कौशल के नमूने के साथ एक संगठक के रूप में सामने आए। 1987 में नरेंद्र मोदी के जीवन का एक अलग अध्याय तब शुरु हुआ, जब उन्होंने गुजरात में भारतीय जनता पार्टी के महासचिव के रूप में कार्य करना शुरु किया।

मोदी आर्काइव के अनुसार, 1987 में 36 साल के नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनावों के लिए भाजपा के कैंपेन की कमान संभाली। यह एक ऐसा काम था जिसे लगभग नामुमकिन माना जा रहा था लेकिन इसने ‘केसरिया पार्टी’ (भाजपा) की किस्मत पूरी तरह बदल दी। अपनी बेहतरीन प्लानिंग और असरदार बातचीत के दम पर भाजपा दो-तिहाई सीटें और मेयर का पद जीतने में कामयाब रही। इसी के साथ नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई और गुजरात व पूरे भारत में भाजपा के लिए एक नए दौर का आगाज हुआ।

उन्होंने 1990 के गुजरात विधानसभा चुनावों में भी भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनाई। 1995 के विधान सभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के संगठन कौशल के फलस्वरूप भारतीय जनता पार्टी का मत प्रतिशत बढ़ा और पार्टी ने 121 सीटें जीतीं।

1995 में राष्ट्रीय मंत्री के नाते नरेंद्र मोदी को पांच प्रमुख राज्यों में पार्टी संगठन का काम दिया गया, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। 1998 में नरेंद्र मोदी को पदोन्नत करके राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) का उत्तरदायित्व दिया गया। इस पद पर वह अक्टूबर 2001 तक काम करते रहे।

2001 में भुज में भूकम्प के बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के बिगड़ते स्वास्थ्य और खराब सार्वजनिक छवि के कारण नरेंद्र मोदी को 2001 में गुजरात में सरकार का नेतृत्व करने का मौका मिला। जब 7 अक्टूबर 2001 को मोदी के नेतृत्व में सरकार ने शपथ ली, तब गुजरात की अर्थव्यवस्था जनवरी 2001 में आए भीषण भूकंप सहित कई प्राकृतिक आपदाओं के प्रतिकूल प्रभावों से जूझ रही थी।

दिसंबर 2002 के आम चुनावों में मोदी ने भाजपा को भारी जीत दिलाई और मोदी सरकार 182 सीटों वाली विधानसभा में 128 सीटों के भारी बहुमत से सत्ता में वापस आई। इसके बाद 25 दिसंबर 2007 को तीसरी बार नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वहीं, 2012 से 22 मई 2024 तक चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर काम किया।

नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और वे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री हैं, जिनका जन्म आजादी के बाद हुआ है। 2014 और 2019 के संसदीय चुनावों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की और दोनों बार पूर्ण बहुमत प्राप्त किया। इससे पहले किसी राजनीतिक दल ने ऐसा पूर्ण बहुमत 1984 के चुनावों में प्राप्त किया था। 2024 के संसदीय चुनावों में एक और निर्णायक जीत के बाद नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2024 को तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।