लखनऊ, 21 अगस्त (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर सपा नेता उदयवीर सिंह की प्रतिक्रिया सामने आई है।
आईएएनएस से बातचीत करते हुए उदयवीर सिंह ने कहा कि देश में अधिकांश दलों की ओर से इस बात पर राजनीति की जा रही है कि जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी। भाजपा की ओर से भी इसी लाइन पर बात की जाती है। क्षेत्रीय दलों की ओर से जातिगत आरक्षण और खुद के लिए हक-हिस्सेदारी की राजनीति की जाती है। कई लोग सपा की ओर से दी गई सीटों से असंतुष्ट होकर भाजपा के साथ गए हैं।
उदयवीर सिंह ने कहा कि पीडीए समाज की संख्या भी है और राजनीति का ये सिद्धांत भी है और व्यवहारिकता भी है। हमें आशा और विश्वास है कि जो लोग सपा के साथ रहकर 18 और 35 सीटों पर चुनाव लड़े थे, वे दूसरे के यहां गए हैं तो उनको ज्यादा सीटें मिलेंगी। मेरा मनना है कि पीडीए समाज को हिस्सेदारी और भागीदारी मिलनी चाहिए। समाजवादी पार्टी ने जिस तरह से लोकसभा में सबको भागीदारी दी थी, वैसे ही देने का काम कर रही है।
अखिलेश यादव के सपा की सरकार आने पर जातिगत आरक्षण के देने वाले बयान पर उदयवीर सिंह ने कहा कि अगर संजय निषाद की ओर से यह शर्त रखी गई होती कि जब आरक्षण दे दोगे तब मैं समर्थन करूंगा, तो ये सारी बातें पहले पूरी हो गई होती। उनकी प्राथमिकता मंत्री बनने में थी। अब चुनाव आ गया है तो दोबारा से आरक्षण की बात कर रहे हैं। यही वजह है कि उनके समाज को लोकसभा में भागीदारी नहीं मिली और समाजवादी पार्टी ने निषाद समाज के दो-दो लोगों को सांसद बनाया।
उदयवीर सिंह ने कहा कि भाजपा की सरकार पर दबाव है कि स्कूलों के बुरे हाल, बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार जनता के सामने न आए। जेन-जी और जेन-अल्फा सड़कों पर आ रहे हैं, इससे सरकार की किरकिरी हो रही है। इसलिए इसपर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान है। सरकार को परिस्थिति सुधारने पर काम करना चाहिए, उसे छिपाने पर नहीं।
भाजपा विधायक की ओर से जातिगत भेदभाव का आरोप लगाने पर उदयवीर सिंह ने कहा कि आजाद भारत में यह शर्मनाक बात है। सत्ता पक्ष की विधायक को दलित होने पर मंदिर में पूजा करने से रोक दिया गया। यह लोकतंत्र का अपमान है। इस मामले में गंभीर कार्रवाई की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट की ओर से झारखंड सरकार के फैसले पर रोक लगाए जाने के मामले पर उदयवीर सिंह ने कहा कि बच्चों के आंदोलन के मद्देनजर झारखंड की सरकार की ओर से नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया गया था। कोर्ट कानून के अनुसार काम करता है, लेकिन सरकार जनभावना के अनुसार काम करती है। अवधारणा यह है कि वहां बेइमानी की गई, इसी वजह से सरकार की ओर से कार्रवाई की गई थी। अब कोर्ट का जो अंतिम फैसला होगा वो सबको मानना होगा।
‘वंदे मातरम’ को लेकर उदयवीर सिंह ने कहा कि जिन सरकारों के पास कोई रिपोर्ट-कार्ड नहीं होता, वो विवादित मुद्दों को छेड़ते रहते हैं और उनकी कोशिश होती है कि मूल मुद्दों पर बात न आए। ‘वंदे मातरम’, देशभक्ति और धर्म को भाजपा ने विवाद पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया है और उसी प्रक्रिया में भाजपा लगी हुई है।

