Wednesday, August 12, 2026
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सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार, लेकिन विपक्ष हंगामा करने पर आमादा : किरेन रिजिजू

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नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन को लेकर संसद में जारी हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने विपक्ष पर निशाना साधा है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को कहा कि सरकार हर मुद्दे पर खुले दिल से चर्चा को तैयार है, लेकिन विपक्ष बिना कुछ सुने हंगामा करने पर आमादा है।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, “मैं बहुत निराश हूं। जिंदगी में पहली बार मैं ऐसा दृश्य देख रहा हूं, जहां सरकार सदन में चर्चा चाहती है, लेकिन विपक्ष भाग रहा है। इसकी कल्पना करना मुश्किल है क्योंकि लोकतंत्र में विपक्ष ही चर्चा की मांग करता है और सरकार जवाब देती है। यहां तो सरकार खुद ही चर्चा के लिए कह रही है, लेकिन विपक्ष जवाब सुनना नहीं चाहता है और वे भाग रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों की आप कल्पना कर सकते हैं?”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये परिस्थिति लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। विपक्ष की कोई जिम्मेदारी होती है। नीट पेपर लीक के बाद छात्रों ने आंदोलन किया, विपक्ष ने मांग की कि इस पर चर्चा होनी चाहिए, केंद्रीय गृह मंत्री का जवाब चाहिए। हम बार-बार कहते हैं कि हम चर्चा चाहते हैं लेकिन वे (विपक्ष) मान नहीं रहे हैं। मजबूरन केंद्रीय गृह मंत्री को एक पत्र लिखना पड़ा।

रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखा कि हम बहुत खुले मन से, विस्तार से, चर्चा के लिए तैयार हैं। विपक्षी पार्टी के नेता को मनाइए। ये आपने कभी सुना है। सरकार खुद हाथ जोड़कर के स्पीकर से निवेदन कर रही है कि विपक्षी पार्टी के नेता को मनवाएं। मैं खुद चर्चा के लिए बहुत व्याकुल हो चुका हूं। हम तुरंत चर्चा चाहते हैं। ये देश के लिए ठीक नहीं है। हमने आज भी विपक्ष से कहा कि हम चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, नेता विपक्ष को मनाएं और चर्चा कीजिए।

रिजिजू ने कहा कि मैं केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री के तौर पर बहुत दुखी हूं, लेकिन एक सांसद के तौर पर भी मैं दुखी हूं। दुखी होना स्वाभाविक है, क्योंकि संसद की कार्यवाही नहीं चलेगी तो सभी को दुख होगा। मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस और कुछ विपक्षी दल हंगामा कर रहे हैं, जनता भी जानना चाहती है कि आखिर वे चर्चा से क्यों भाग रहे हैं?

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि हमारे द्वारा चर्चा के लिए अपील करने के बाद स्वीकृति देने के बाद भी वे (विपक्ष) मानते नहीं हैं। सत्र खत्म होने वाला है तो गृह मंत्री को मजबूर होकर लोकसभा अध्यक्ष को ये पत्र लिखना पड़ा और निवेदन करना पड़ा कि वे विपक्ष के लोगों को चर्चा के लिए मनाएं। 30 साल का मेरा अनुभव है। तीन दशक के इस अनुभव के साथ मैं कह रहा हूं कि ऐसा विपक्ष मैंने अपने जीवन में नहीं देखा और न मैं कल्पना कर सकता हूं कि सरकार चर्चा चाहती है और विपक्ष चर्चा से भाग रहा है।

उन्होंने कहा कि संसद में सरकार अपनी बात नहीं रख सकती। वे (विपक्ष) सुनना नहीं चाहते हैं तो संसद कैसे चलेगा?