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सरकार की नीतियों पर प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए सवाल, कहा- पहले ही उठाने चाहिए थे कदम

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नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। ईरान की ओर से भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरू मध्य से निकलने की अनुमति देने पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने जहाजों को गुजरने की अनुमति मिलने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो मैं दी गई अनुमति का स्वागत करती हूं लेकिन यह अनुमति भारत की ओर से ईरान के संबंध में अंतिम रुख अपनाने के बाद ही मिली है।

उन्होंने कहा कि जब ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ा, तो खामेनेई की मौत के बाद सरकार की ओर से कोई बयान नहीं आया। उन्होंने कहा कि खामेनेई का ईरान में जिस तरह का शासनकाल रहा होगा, वो निंदनीय है, आपत्तिजनक है। ये भी सच्चाई है कि खामेनेई शिया समुदाय का धार्मिक नेता थे। हमारे देश में शिया समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। भारत और ईरान का संबंध काफी सालों से है।

उन्होंने कहा कि संघर्ष शुरू होने से दो दिन पहले हमारे पीएम इजरायल पहुंचे थे। हमने देखा कि स्कूल में बम गिरा, जिससे छोटी बच्चियों की मौत हो गई। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को इस घटना को स्वीकार किया है। पीएम ने गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति से बात की। इसके बाद से इसका समाधान हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार को ये कदम पहले ही उठा लेने चाहिए थे। दबाव में आकर पीएम ने जो चुप्पी तोड़ी है, उसे पहले ही चुप्पी तोड़नी चाहिए थी।

संसद सत्र को लेकर उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान प्रधानमंत्री मोदी भी नियमित रूप से उपस्थित नहीं होते। यह सिर्फ विपक्ष के नेता की बात नहीं है। विपक्ष के नेता जहां भी जाते हैं, हमारे पास उनका रिकॉर्ड होता है लेकिन अगर प्रधानमंत्री मोदी व कैबिनेट मंत्रियों समेत सभी की उपस्थिति दर्ज की जाए, तो उनकी उपस्थिति नेता विपक्ष से भी कम हो सकती है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से संभाले जाने वाले कार्यों के कारण प्रधानमंत्री अक्सर संसद में उपस्थित नहीं हो पाते।