सुप्रीम कोर्ट ने डीएमएफ फंड ‘घोटाला’ मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत दी

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नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ में कथित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत दे दी।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने टुटेजा को राहत देते हुए कहा कि वह अप्रैल 2024 से हिरासत में हैं और मुकदमे में काफी समय लगने की संभावना है।

इस बात पर गौर करते हुए कि 85 गवाहों से पूछताछ किए जाने का प्रस्ताव है, शीर्ष अदालत ने कहा कि मुकदमे के पूरा होने में समय लगेगा और इसी तरह की स्थिति वाले सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह सच है कि याचिकाकर्ता पर गंभीर आरोप हैं, लेकिन यह मुकदमे का विषय होगा। हम मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करना उचित समझते हैं।

शीर्ष अदालत को बताया गया कि टुटेजा को इस मामले में 23 फरवरी, 2026 को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन वह अन्य मामलों के सिलसिले में 21 अप्रैल, 2024 से ही हिरासत में थे।

राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी शर्तें लगाईं और टुटेजा को निर्देश दिया कि वह छत्तीसगढ़ से बाहर रहें और रिहाई के एक सप्ताह के भीतर एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और संबंधित पुलिस स्टेशन को अपने रहने की जगह का विवरण और संपर्क नंबर दें।

पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि वह सुनवाई की हर तारीख पर निचली अदालत में पेश हों, जब तक कि उन्हें छूट न दी गई हो, और वह गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोशिश न करें।

सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने जमानत दिए जाने का विरोध करते हुए तर्क दिया कि टुटेजा डीएमएफ घोटाले सहित कई घोटालों में मुख्य साजिशकर्ता थे, और उनका गवाहों को प्रभावित करने तथा जांच में हस्तक्षेप करने का इतिहास रहा है।

उन्होंने कुछ व्हाट्सएप संदेशों का भी हवाला दिया, जिनसे कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि उन्होंने पिछले मामलों में अपने पक्ष में फैसले हासिल करने की कोशिश की थी।

हालांकि, टुटेजा के वकील ने तर्क दिया कि इसी तरह के आरोपों पर पहले भी विचार किया जा चुका है और उन्हें अन्य मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी है। डीएमएफ मामला खनन-प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों के लिए रखे गए फंड के इस्तेमाल में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है, जिसमें टेंडर प्रक्रियाओं में हेरफेर और अवैध कमीशन लेने के आरोप भी शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस साल अप्रैल में टुटेजा की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।

कोर्ट ने कहा था कि पहली नजर में ऐसे सबूत मौजूद हैं जो कथित अपराधों में उनकी संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं और उनकी प्रभावशाली स्थिति को देखते हुए, इस बात की पूरी संभावना है कि वे सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की एकल-न्यायाधीश पीठ ने यह राय दी थी कि आर्थिक अपराध पूरी ठंडी सोच और सोची-समझी योजना के साथ, सिर्फ अपने निजी फायदे के लिए किए जाते हैं, भले ही उनका समुदाय पर क्या असर पड़े।

इसलिए, ज़मानत के मामलों में ऐसे अपराधों के प्रति ज्यादा सख्त रवैया अपनाए जाने की जरूरत है।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद शुरुआती सबूतों से यह साफ जाहिर होता है कि वे आईपीसी की उन धाराओं के तहत आने वाले कथित अपराधों में शामिल थे जो धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से जुड़ी हैं, साथ ही वे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी दोषी पाए जा सकते हैं।