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‘स्कूलों में अभिभावकों और जनता के जाने पर कोई पाबंदी नहीं’, असम सरकार ने खबरों का किया खंडन

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गुवाहाटी, 30 सितंबर (आईएएनएस)। असम सरकार ने उस खबर का खंडन किया है, जिसमें स्कूलों में आम जनता और अभिभावकों के जाने पर रोक लगाने की बात कही गई थी। सरकार ने कहा कि झूठी खबर फैलाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

असम सीएमओ की ओर से एक्स पोस्ट में कहा गया, “कुछ मीडिया संस्थानों में सरकारी स्कूलों में लोगों के जाने पर पाबंदी और अनुमति की जरूरत के बारे में आई खबरें पूरी तरह से झूठी और बेबुनियाद हैं। जनता और अभिभावक बिना किसी रोक-टोक के हमेशा की तरह स्कूलों में जा सकते हैं। इस तरह का दुर्भावनापूर्ण झूठ फैलाकर असम की शिक्षा व्यवस्था को बदनाम करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।”

असम के शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगु ने भी इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने एक्स पोस्ट में कहा, “मैं यह साफ करना चाहता हूं कि स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी या प्रांतीय स्कूलों में जाने पर किसी भी तरह की रोक लगाने वाला कोई नोटिस या सर्कुलर जारी नहीं किया है। मीडिया के एक हिस्से में छपी ऐसी खबरें गलत हैं। अभिभावकों और नागरिकों का हमारे स्कूलों में आने और सुझाव देने के लिए स्वागत है। हालांकि, आने वालों को यह पक्का करना होगा कि रेगुलर क्लास में कोई रुकावट न आए और पढ़ाई-लिखाई का माहौल बना रहे।”

एक अन्य पोस्ट में शिक्षा मंत्री ने कहा, “सिविल सोसाइटी के सदस्यों के स्कूल दौरे पर लगी पाबंदियों के बारे में व्हाट्सऐप पर गलत मैसेज फैलाने के लिए नूरुल हुसैन नाम के एक सीआरसीसी को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया है।”

स्कूल इंस्पेक्टर की ओर से नूरुल हुसैन को भेजे गए पत्र में कहा गया है, “आपने आधिकारिक क्लस्टर ग्रुप में एक अनधिकृत और आपत्तिजनक संदेश भेजा था, जिसमें कामरूप मेट्रो जिले के ‘इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स’ का नाम और पद बिना मेरी पूर्व मंजूरी, अधिकार या निर्देश के इस्तेमाल किया गया था। बिना उचित अधिकार के कोई भी संदेश, निर्देश या सूचना भेजने के लिए मेरा नाम व पद इस्तेमाल करने की घटना को बहुत गंभीरता से लिया जाता है। कोई भी सीआरसीसी ‘इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स’ की ओर से कोई सूचना जारी करने, उसे फैलाने या उसका श्रेय उन्हें देने के लिए अधिकृत नहीं है, जब तक कि सक्षम अधिकारी ने उसे विधिवत मंजूरी न दी हो या आधिकारिक तौर पर सूचित न किया हो।”

इसके साथ ही पत्र में नूरुल हुसैन को 24 घंटे में लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।