Friday, June 5, 2026
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स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस, केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने की समीक्षा

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नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, परीक्षा का दबाव और बदलती जीवनशैली के बीच स्कूली छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी उद्देश्य से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वरिष्ठ अधिकारियों, समिति के सदस्यों और विशेषज्ञों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक की है। यह बैठक स्कूलों के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति के मसौदे पर केंद्रित रही।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री की इस समीक्षा बैठक में विद्यार्थियों, शिक्षकों और पूरे विद्यालय समुदाय के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को सुदृढ़ बनाने के उपायों पर व्यापक चर्चा हुई। यहां कहा गया कि मानसिक स्वास्थ्य को केवल समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसके लिए समग्र और निवारक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने विद्यालयों में सुरक्षित, समावेशी और सहयोगात्मक वातावरण विकसित करने पर जोर देते हुए कहा कि ऐसी सकारात्मक स्कूल संस्कृति बनाई जानी चाहिए, जो मानसिक स्वास्थ्य, सहानुभूति, देखभाल, विश्वास और भावनात्मक दृढ़ता को बढ़ावा दे।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को विद्यालयी व्यवस्था, प्रक्रियाओं और क्रियान्वयन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार बन सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों का भावनात्मक और मानसिक विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनका शैक्षणिक विकास। कई विशेषज्ञों व शिक्षाविदों का यह भी सुझाव है कि प्रस्तावित नीति भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और जीवन मूल्यों पर आधारित हो तथा व्यावहारिक रूप से स्कूलों में लागू की जा सके।

शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षकों को विद्यार्थियों के लिए प्रथम स्तर के मार्गदर्शक के रूप में विकसित करने पर बल दिया। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि शिक्षक छात्रों की भावनात्मक जरूरतों को समझने और समय रहते सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रस्तावित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति का उद्देश्य देश के स्कूलों में ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां हर छात्र स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और समर्थ महसूस करे। साथ ही स्कूल में पढ़ने वाले छात्र मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर अपने पूर्ण सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ सके।