नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश में ‘सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी की चिप’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) इसका नेतृत्व करेगा। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 27 से 29 अक्टूबर तक होने वाले इस सत्र में स्वदेशी चिप विकास, एआई आधारित तकनीक और रक्षा क्षेत्र में सेमीकंडक्टर के बढ़ते महत्व पर चर्चा होगी।
इस सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के मार्गदर्शन में 12 विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। डीआरडीओ के इस सत्र में उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों, स्वदेशी चिप विकास से जुड़े विशेषज्ञों और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी। यहां चर्चा में विशेष जरूरतों के अनुरूप तैयार चिप, चिप के स्तर पर एआई, व सूक्ष्म प्रोसेसर तकनीक के बदलते स्वरूप पर फोकस किया जाएगा।
इस सत्र का उद्देश्य चिप निर्माण, चिप डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास तथा रक्षा क्षेत्र में इनके रणनीतिक उपयोग से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है। साथ ही, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग मजबूत कर देश में एक सशक्त सेमीकंडक्टर तंत्र विकसित करने के अवसर तलाशे जाएंगे।
सम्मेलन में डीआरडीओ की विशेष प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। यहां डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित कई स्वदेशी तकनीकों और उपकरणों को प्रदर्शित किया जाएगा। इनमें उन्नत संचार प्रणालियां, क्वांटम तकनीक के नमूने, अत्यधिक ठंड में उपयोग होने वाले विशेष वस्त्र, महिलाओं के पूरे शरीर की सुरक्षा के लिए बना ‘प्रबला’ सुरक्षा कवच, पोर्टेबल संकर ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली, उच्च शक्ति वाले स्पंदित लेजर डायोड और स्क्रैमजेट इंजन तकनीक शामिल हैं।
इन प्रदर्शनों के जरिए रक्षा अनुसंधान में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयासों को सामने रखा जाएगा। प्रदर्शनी का उद्देश्य उद्योगों, शिक्षण संस्थानों, नवउद्यमों और अनुसंधान संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाना तथा आम लोगों को देश की वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों से परिचित कराना भी है।
डीआरडीओ के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार प्रणाली महानिदेशक डॉ. बीके दास ने सेमीकंडक्टर और अगली पीढ़ी के चिप को आर्थिक प्रतिस्पर्धा, डिजिटल संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत को दूरसंचार, वाहन प्रणालियों, औद्योगिक स्वचालन, एआई और रक्षा प्लेटफार्म की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक तंत्र विकसित करना होगा।
