नई दिल्ली, 27 अगस्त (आईएएनएस)। थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने गुरुवार को जयपुर स्थित सप्त शक्ति कमान के मुख्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कमान की ऑपरेशनल तैयारियों और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए चल रही विभिन्न पहलों की समीक्षा की।
सेनाध्यक्ष ने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारतीय सेना को लगातार फुर्तीली व परिस्थितियों के अनुसार तेजी से ढलने वाली फोर्स बने रहना है। साथ ही स्वयं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाए रखना भी जरूरी है। सेना प्रमुख ने उभरती तकनीकों को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने पर भी विशेष जोर दिया।
इस दौरान सप्त शक्ति कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा ने सेना प्रमुख को क्षेत्र के मौजूदा परिचालन वातावरण की जानकारी दी। उन्होंने सैनिकों की तैयारियों, प्रशिक्षण गतिविधियों और युद्धक क्षमता तथा मिशन की तैयारी को और बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे उपायों की विस्तृत जानकारी सेना प्रमुख को दी।
जनरल धीरज सेठ ने इस दौरान भारतीय सेना को तकनीक आधारित और भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार बल में बदलने का उद्देश्य दोहराया। इस उद्देश्य से तैयार किए गए ‘विजय’ पांच सूत्रीय रणनीतिक मार्गदर्शक ढांचे में बताए गए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों को शामिल करते हुए प्रशिक्षण व्यवस्था को लगातार गतिशील बनाया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए ताकि किसी भी तरह के संघर्ष की स्थिति में भारतीय सेना अपनी निर्णायक बढ़त बनाए रख सके।
सेना प्रमुख ने सप्त शक्ति कमान के सभी रैंक के अधिकारियों और जवानों की ओर से प्रदर्शित किए जा रहे उच्च स्तर की परिचालन तैयारी, पेशेवर दक्षता और प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने सैनिकों का आह्वान किया कि वे देश की सेवा में लगातार सतर्कता, पेशेवर उत्कृष्टता और अटूट संकल्प बनाए रखें। जयपुर दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ ने राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से भी मुलाकात की। इन मुलाकातों के दौरान नागरिक-सैन्य समन्वय और सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। बेहतर तालमेल तथा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
गौरतलब है कि सप्त शक्ति कमान भारतीय सेना की महत्वपूर्ण कमानों में से एक है और पश्चिमी क्षेत्र में सुरक्षा तथा परिचालन तैयारियों के लिहाज से इसकी अहम भूमिका है। सेना प्रमुख का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब भारतीय सेना अपनी युद्धक क्षमताओं को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप लगातार मजबूत करने पर जोर दे रही है।
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