Wednesday, July 22, 2026
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Home राष्ट्रीय शेलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस ‘मालवन’, दुश्मन की पनडुब्बी की टोह लेगा

शेलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस ‘मालवन’, दुश्मन की पनडुब्बी की टोह लेगा

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नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना में एक नया योद्धा ‘आईएनएस मालवन’ शामिल हुआ है। यह एक स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित माहे श्रेणी का ‘एंटी सबमरीन वॉरफेयर शेलो वाटर क्राफ्ट’ है। यह उथले जल में अपने मिशनों को अंजाम देने में पूरी तरह से सक्षम है। आईएनएस मालवन को बुधवार को करवार में औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल कर लिया।

नौसेना के अनुसार, आईएनएस मालवन बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसैनिक विमानन संसाधनों के साथ समन्वित रूप से संचालन करने में सक्षम है। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमता और समुद्री सुरक्षा तंत्र को नई मजबूती मिलेगी।

नौसेना का कहना है कि यह युद्धपोत भारत के समुद्री हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए हर समय और हर परिस्थिति में तत्पर रहेगा। युद्धपोत के प्रतीक चिह्न में ‘बाघ नख’ को दर्शाया गया है। यह प्रतीक चिह्न साहस, युद्ध कौशल, फुर्ती और दुश्मन पर तेज एवं सटीक प्रहार की क्षमता का प्रतीक है। इसके चारों ओर बनी समुद्री लहरें भारतीय समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के प्रति नौसेना की सतत सतर्कता और प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। पोत का ध्येय वाक्य ‘साइलेंट क्लॉज’ है, जो इसकी गुप्त, घातक और त्वरित आक्रमण क्षमता को प्रतिबिंबित करता है।

इस युद्धपोत का निर्माण 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और प्रणालियों के साथ किया गया है। यह माहे श्रेणी का दूसरा पनडुब्बी रोधी उथले जल युद्धपोत है, जिसके शामिल होने से नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी। आईएनएस मालवन के कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने की।

इस अवसर पर पश्चिमी नौसैनिक कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधि, नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैनिक और अन्य विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। आईएनएस मालवन का नाम भारतीय नौसेना के पूर्व इनशोर माइंसवीपर पोत मालवन के नाम पर रखा गया है, जिसे वर्ष 2003 में 19 वर्षों की गौरवशाली सेवा के बाद सेवामुक्त किया गया था। यह परियोजना भारत के बढ़ते नौसैनिक डिजाइन, उपकरण निर्माण और प्रणाली एकीकरण तंत्र को मजबूती प्रदान करती है। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित होने के कारण यह युद्धपोत आत्मनिर्भर भारत अभियान का महत्वपूर्ण उदाहरण भी माना जा रहा है।

समारोह को संबोधित करते हुए वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा देश की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारतीय नौसेना की प्रगति और आत्मनिर्भरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की सराहना की।

उन्होंने कहा कि युद्धपोत निर्माण प्रक्रिया में नौसेना अधिकारियों की प्रत्यक्ष भागीदारी आत्मनिर्भरता को गति देने का प्रभावी मॉडल है, जिसे व्यापक रक्षा क्षेत्र में भी अपनाया जा सकता है। उन्होंने भविष्य के युद्धों में सफलता के लिए थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर समन्वय और संयुक्तता की आवश्यकता पर भी बल दिया।