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शी चिनफिंग एससीओ बिश्केक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, किर्गिस्तान और मिस्र की यात्रा करेंगे

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बीजिंग, 26 अगस्त (आईएएनएस)। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बुधवार को बताया कि 30 अगस्त से 3 सितंबर तक राष्ट्रपति शी चिनफिंग किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 2026 शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वह किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सिसी के निमंत्रण पर दोनों देशों की राजकीय यात्रा भी करेंगे।

इसी दिन पेइचिंग में विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता लिन च्येन ने एससीओ बिश्केक शिखर सम्मेलन से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि इस वर्ष एससीओ की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ है। पिछले 25 वर्षों में सदस्य देशों ने शांगहाई भावना को कायम रखते हुए एससीओ को दुनिया का सबसे बड़ा, सबसे अधिक आबादी वाला और सबसे आशाजनक व्यापक क्षेत्रीय सहयोग संगठन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पिछले वर्ष चीन के थ्येनचिन शहर में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए लिन च्येन ने कहा कि थ्येनचिन सम्मेलन ने एससीओ के उच्च स्तरीय विकास के एक नए चरण की शुरुआत की।

उन्होंने कहा कि चीन बिश्केक शिखर सम्मेलन में आम सहमति को और मजबूत करने, सहयोग का नया अध्याय लिखने, क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा, स्थिरता, विकास और पुनरुत्थान को बढ़ावा देने तथा मानव जाति के साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण में सकारात्मक योगदान देने के लिए सभी पक्षों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।

इसके अलावा, प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता लिन च्येन ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग की किर्गिस्तान और मिस्र यात्रा के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चीन और किर्गिस्तान पहाड़ों और नदियों से जुड़े अच्छे पड़ोसी, एक-दूसरे पर भरोसा करने वाले अच्छे दोस्त और समान लक्ष्यों वाले अच्छे साझेदार हैं। पिछले साल राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने राष्ट्रपति जापारोव से तीन बार मुलाकात की। इससे चीन और किर्गिस्तान के बीच सहयोग के तेजी से विकास का एक स्वर्णिम दौर शुरू हुआ।

राष्ट्रपति शी की आगामी किर्गिस्तान यात्रा के बारे में प्रवक्ता ने कहा कि इस दौरान दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच वार्ता होगी। दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों, प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग और अंतरराष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय स्थिति पर गहन विचार-विमर्श करेंगे। इसके अलावा, राष्ट्रपति शी विभिन्न राजकीय कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे।

लिन च्येन ने आगे कहा कि चीन किर्गिस्तान के साथ मिलकर इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापक और पारस्परिक लाभ वाले सहयोग के उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देना चाहता है। साथ ही, दोनों देशों के साझा भविष्य वाले समुदाय के अर्थ को और समृद्ध करना चाहता है, ताकि दोनों देशों के लोगों को इसका लाभ मिल सके।

वहीं, राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मिस्र यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए लिन च्येन ने कहा कि मिस्र उन पहले अरब और अफ्रीकी देशों में से एक था, जिसने चीन लोक गणराज्य के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। हाल के वर्षों में दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के रणनीतिक मार्गदर्शन में चीन और मिस्र के बीच राजनीतिक आपसी विश्वास लगातार गहरा हुआ है। विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के अच्छे नतीजे मिले हैं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान लगातार बढ़ा है और बहुपक्षीय सहयोग भी अधिक घनिष्ठ और प्रभावी हुआ है।

लिन च्येन के अनुसार, यह यात्रा 10 वर्षों में राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मिस्र की पहली राजकीय यात्रा होगी। यह यात्रा चीन और मिस्र के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रही है। दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने, अतीत की उपलब्धियों को आगे ले जाने और भविष्य की ओर बढ़ने के लिहाज से इस यात्रा का विशेष और महत्वपूर्ण महत्व है। यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शी चिनफिंग और राष्ट्रपति सिसी के बीच वार्ता होगी। दोनों नेता चीन-मिस्र संबंधों और साझा चिंता वाले अंतरराष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श करेंगे।

चीनी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि चीन इस यात्रा के जरिए मिस्र के साथ पारस्परिक लाभ वाले सहयोग का विस्तार करने और एक-दूसरे की आधुनिकीकरण प्रक्रिया में योगदान देने की उम्मीद करता है। साथ ही, दोनों देश चीन-मिस्र संबंधों में सहयोग का नया अध्याय लिखने और क्षेत्रीय तथा वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने में सकारात्मक योगदान देने के लिए मिलकर काम करेंगे।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)