सिद्धार्थनगर, 29 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने सोमवार को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह में युवाओं से शिक्षा को राष्ट्र निर्माण, नवाचार और मानव कल्याण से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री बांटने वाले संस्थान नहीं, बल्कि समाज और देश को दिशा देने वाली प्रयोगशालाएं हैं।
इस अवसर पर 52,176 विद्यार्थियों को उपाधि, 37 मेधावियों को स्वर्ण पदक और 25 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उपाधि केवल शैक्षणिक प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि ज्ञान, उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण का संकल्प है। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक सोच, नवाचार, नैतिक मूल्यों और सेवा भावना के साथ विकसित भारत-2047 के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
समारोह में सभी उपाधियों और अंकपत्रों को डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराया गया। 37 स्वर्ण पदक विजेताओं में 28 छात्राएं और नौ छात्र शामिल रहे, जबकि 25 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
राज्यपाल ने आंगनबाड़ी सशक्तीकरण और बालिका स्वास्थ्य अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और संतकबीरनगर के कुल 700 आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरित की गई। साथ ही 600 बेटियों का एचपीवी टीकाकरण कराया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक करीब 60 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं और लगभग तीन लाख बेटियों का एचपीवी टीकाकरण कराया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय से अब यह वैक्सीन बेटियों को निःशुल्क उपलब्ध होगी। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण अनुकूल परिसर विकसित करने के निर्देश देते हुए प्रत्येक विश्वविद्यालय में मियावाकी वन और वर्षा जल संरक्षण के लिए तालाब विकसित करने पर जोर दिया।
उन्होंने गुजरात के सूरत के ‘सर्कुलर वाटर इकोनॉमी’ मॉडल का उल्लेख करते हुए जल संरक्षण और अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग की दिशा में स्थानीय स्तर पर पहल करने का आह्वान किया। साथ ही ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल को जनआंदोलन बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने दहेज प्रथा को सामाजिक अभिशाप बताते हुए विश्वविद्यालयों से इसके खिलाफ जनजागरूकता अभियान चलाने की अपील की।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि समाज और मानवता के कल्याण के लिए जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित समीक्षा, नवाचार और आधुनिक तकनीक आधारित शैक्षणिक वातावरण विकसित किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में विकसित ‘किलकारी’ क्रच और ‘कलरव’ बाल उपवन का लोकार्पण किया।
साथ ही दीक्षांत स्मारिका, वार्षिक प्रतिवेदन, शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों तथा दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए विकसित ‘केबो’ सॉफ्टवेयर का शुभारंभ किया। उन्होंने उत्कृष्ट शिक्षकों, पुलिस अधिकारियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभागी बच्चों तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित भी किया।

