नई दिल्ली, 18 जून (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) गुट से जुड़े छह सांसदों की सुरक्षा बढ़ाए जाने का मामला सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की सतर्कता के बाद महाराष्ट्र पुलिस और राज्य गृह विभाग ने इन सांसदों की सुरक्षा व्यवस्था को अपग्रेड करते हुए उन्हें वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश जारी किए हैं।
महाराष्ट्र गृह विभाग का आदेश राज्य की इंटेलिजेंस रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, जिसमें इन सांसदों की सुरक्षा को संभावित खतरे का संकेत दिया गया था। जिन छह सांसदों की सुरक्षा बढ़ाई गई है, उनमें संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। ये सभी हाल के दिनों में पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों से अनुपस्थित रहे थे।
बताया जा रहा है कि दिल्ली में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) सांसदों की एक बैठक के दौरान ये छह सांसद मौजूद नहीं थे। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि ये नेता पार्टी से अलग होकर किसी अन्य गुट में शामिल हो सकते हैं या नया राजनीतिक समीकरण बना सकते हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक किसी भी पक्ष द्वारा नहीं की गई है।
इस बीच, राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। संजय राउत द्वारा दिए गए एक बयान के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया, जिसके बाद गृह विभाग ने राज्य इंटेलिजेंस को तत्काल सुरक्षा समीक्षा करने के निर्देश दिए। इंटेलिजेंस कमिश्नर की सिफारिश पर इन सांसदों की सुरक्षा को वाई-प्लस श्रेणी में अपग्रेड करने का आदेश जारी हुआ।
वाई-प्लस सुरक्षा श्रेणी के तहत प्रत्येक नेता को सशस्त्र सुरक्षा कर्मियों की एक विशेष टीम तैनात की जाती है, जो उनके आवास, यात्रा और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह सुरक्षा व्यवस्था आमतौर पर उन व्यक्तियों को दी जाती है, जिन्हें उच्च स्तर का खतरा माना जाता है।
बता दें कि महाराष्ट्र की वाई-प्लस सुरक्षा में कुल 11 सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं। इस सुरक्षा घेरे में 1 या 2 कमांडो (पीएसओ) के अलावा, सशस्त्र पुलिसकर्मी (लोकल पुलिस या राज्य सुरक्षा बल) शामिल होते हैं, जो इनके साथ 24 घंटे रहते हैं और इनकी सुरक्षा करते हैं।

