Friday, June 19, 2026
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शोषण की शिकायतों पर पवनजीत माने की महाराष्ट्र सरकार से मांग, कंपनियों में अनिवार्य कर्मचारी समिति बनाई जाए

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पुणे, 15 जून (आईएएनएस)। आईटी सेक्टर में कर्मचारियों के साथ हो रहे कथित शोषण और खराब व्यवहार को लेकर आईटी एम्प्लॉइज फोरम के अध्यक्ष पवनजीत माने ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने टीसीएस सहित बड़ी आईटी कंपनियों पर जबरन इस्तीफा दिलाने, उचित मुआवजा न देने और शिकायतों का समाधान न करने का गंभीर आरोप लगाया है।

माने ने कहा कि कर्मचारियों की स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि वे अपनी बात कहीं रख नहीं पा रहे हैं। बढ़ते दबाव के कारण सुसाइड जैसे मामले सामने आ रहे हैं।

पुणे में आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से मांग की कि कंपनियों में अनिवार्य कर्मचारी समिति (मैनडेटरी इंप्लॉइ कमेटी) बनाई जाए, ताकि कर्मचारी अपनी समस्याएं बिना डर के रख सकें। फोरम अध्यक्ष ने बताया कि हाल ही में एक और सुसाइड का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि जितने टीसीएस के केस आ रहे हैं, वहां एचआर सिस्टम कर्मचारियों के शिकायत लेने को तैयार नहीं है। शिकायत करने पर टर्मिनेट करने की धमकी दी जा रही है। कंपनियां कर्मचारियों की आवाज को दबा रही हैं।

माने ने कहा कि अगर कंपनी में कर्मचारी की बात नहीं सुनी जा रही है, तो कर्मचारी अगर श्रम विभाग का रुख करता है तो कंपनी से टर्मिनेट करने की धमकियां दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि आईटी कंपनियों में कर्मचारियों के साथ हो रहे शोषण के खिलाफ पिछले महीने लेबर मिनिस्टर और लेबर कमिश्नर के सामने यह मुद्दा उठाया गया था।

टीसीएस नासिक का मामला उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कमेटी बनाई गई थी जो टीसीएस का दौरा करती। इसी बीच हमारे पास कुछ ऐसे कर्मचारियों ने अपनी बात पहुंचाई, जिन्हें एचआर की ओर से धमकाया गया। उन्हें धमकी दी गई कि जांच टीम को कुछ नहीं बताना है। सोशल मीडिया पर नासिक टीसीएस से संबंधित कुछ नहीं कहना है। कंपनी की इंटरनल पॉलिसी और हरासमेंट के बारे में बाहर कुछ नहीं बताना है।

फोरम अध्यक्ष ने बताया कि हाल ही में उनके पास एक महिला कर्मचारी भी पहुंची और अपनी समस्याएं बताईं। माने ने सुझाव दिया कि जब भी कोई समिति या जांच टीम कंपनी आए, तो सभी कर्मचारियों से अलग-अलग (एक-एक करके) मिलना चाहिए, ताकि वे बिना दबाव के अपनी बात रख सकें। अगर सभी के सामने बात करेंगे तो कोई कुछ नहीं कह पाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में देखना चाहिए, क्योंकि कंपनी का स्तर बहुत नीचे जा चुका है।