नई दिल्ली, 26 सितंबर (आईएएनएस)। सिख धर्म के तृतीय गुरु श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति ज्योत दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि श्री गुरु अमरदास जी के उच्च आदर्श, आध्यात्मिक दृष्टि और मानव कल्याण के प्रति समर्पित दिव्य जीवन सदैव सभी को प्रेरणा देता रहेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सिख धर्म के तृतीय गुरु, श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति ज्योत दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन। श्री गुरु अमरदास जी ने ‘पहले पंगत, फिर संगत’ की परंपरा को सुदृढ़ करते हुए सामाजिक समरसता और समानता को प्रतिष्ठित किया। उन्होंने जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध मानवता, सेवा और एकता का अमर संदेश दिया। उनके उच्च आदर्श, आध्यात्मिक दृष्टि और मानव कल्याण के प्रति समर्पित दिव्य जीवन सदैव सभी को प्रेरणा देता रहेगा।”
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “प्रेम, दया और करुणा के सागर, सिखों के तृतीय गुरु, श्रद्धेय श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर उनके चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं। आपने धर्म की रक्षा और मानवता के कल्याण के लिए जो पुण्य ज्योत प्रज्वलित की है, वह सदैव देदीप्यमान रहेगी।”
भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पोस्ट किया, “तीसरे गुरु, साहिब श्री गुरु अमर दास जी की ‘ज्योति-जोत’ पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। ‘गुरु का लंगर’ की परंपरा को मजबूत करके ‘पहले पंगत, फिर संगत’ का सिद्धांत देकर गुरु साहिब ने ‘गुरु घर’ में हर जरूरतमंद को समान स्थान दिया गया।”
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लिखा, “सेवा, समता और करुणा का मार्ग दिखाने वाले सिख पंथ के तृतीय गुरु, श्री गुरु अमरदास जी के ज्योति-ज्योत दिवस पर श्रद्धापूर्वक नमन। मानवता के कल्याण और सामाजिक समरसता के लिए उनकी शिक्षाए सदैव हमारा मार्गदर्शन करती रहेंगी।”
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी श्री गुरु अमर दास जी के ज्योति ज्योत दिवस पर नमन किया। उन्होंने लिखा, “गुरु साहिब ने अपने जीवन में सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध खड़े होकर समानता की भावना को सुदृढ़ किया। संगत-पंगत की परंपरा को व्यापक रूप देकर उन्होंने हर व्यक्ति के सम्मान और समान अधिकार का संदेश समाज तक पहुंचाया। उनकी शिक्षाएं आज भी हमें सेवा, सद्भाव और मानवीय गरिमा के मूल्यों को अपनाते हुए समाज को अधिक समरस और एकजुट बनाने की दिशा दिखाती हैं।”
