पटना, 2 अगस्त (आईएएनएस)। राहुल गांधी द्वारा संसद में परिसीमन विधेयक का विरोध किए जाने पर जदयू नेता श्याम रजक ने कहा कि परिसीमन कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पहले भी कई बार हो चुका है।
श्याम रजक ने कहा कि सबसे पहले यह समझने की जरूरत है कि परिसीमन पहली बार नहीं हो रहा है। देश में पहले भी समय-समय पर परिसीमन होता रहा है। कुछ कारणों से यह प्रक्रिया बीच में टलती रही, लेकिन इसका उद्देश्य किसी का अधिकार छीनना नहीं, बल्कि लोगों को बेहतर प्रतिनिधित्व देना है।
उन्होंने कहा कि परिसीमन का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बढ़ती आबादी और बदलती परिस्थितियों के अनुसार हर क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व मिले। जब किसी क्षेत्र की आबादी बढ़ती या घटती है तो निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव जरूरी हो जाता है। इससे मतदाताओं को अपने जनप्रतिनिधि तक पहुंचने में आसानी होती है और जनप्रतिनिधि भी अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं पर अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।
श्याम रजक ने कहा कि जब आबादी, सामाजिक संरचना या अन्य कारणों से असंतुलन पैदा होता है तो उसे संतुलित करने के लिए परिसीमन किया जाता है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए होती है, इसलिए इसे राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय संवैधानिक प्रक्रिया के रूप में समझना चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर संसद परिसर में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और उसके बाद राहुल गांधी तथा निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए श्याम रजक ने कहा कि संसद बहस और संवाद का मंच है, कोई रंगमंच नहीं। संसद में जनहित के मुद्दों पर चर्चा होती है, सवाल पूछे जाते हैं और सरकार जवाब देती है। ऐसे में विरोध का तरीका भी संसदीय गरिमा के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संसद के भीतर या परिसर में ऐसा प्रदर्शन करना, जिससे सदन की गरिमा प्रभावित हो, उचित नहीं कहा जा सकता। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है और विरोध भी उसी मर्यादा में होना चाहिए।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल के “आजादी का मतलब मनमर्जी नहीं” वाले बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए श्याम रजक ने कहा कि यह बात बिल्कुल सही है कि आजादी का मतलब मनमानी नहीं होता। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह नियम केवल आम नागरिकों पर ही नहीं, बल्कि सरकार, प्रशासन, मीडिया और हर संस्था पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर सत्ता पक्ष मनमानी करता है तो वह भी गलत है, अगर प्रशासन अपनी सीमाएं लांघता है तो वह भी गलत है और अगर कोई नागरिक या संस्था कानून से ऊपर जाकर काम करती है तो वह भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र संविधान से चलता है और संविधान ने हर संस्था तथा हर नागरिक के अधिकार और जिम्मेदारियां तय की हैं। इसलिए किसी भी तरह की मनमानी का लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई स्थान नहीं है।
जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुई आतंकी घटना पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की टिप्पणियों पर भी श्याम रजक ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस पर किसी तरह का विवाद नहीं होना चाहिए। वहां के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक को अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता है तो उसे स्थानीय प्रशासन और सरकार से संपर्क करना चाहिए। वहीं सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकवाद से निपटना सेना और सुरक्षाबलों का काम है।
रजक ने लोगों से भी अपील की कि वे सुरक्षा एजेंसियों का सहयोग करें और आतंकवादियों को किसी भी तरह की शरण या मदद न दें।

