Wednesday, August 5, 2026
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सपा का नाम ‘हल्ला-गुल्ला पार्टी’ रख लेना चाहिए: पंकज चौधरी

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लखनऊ, 4 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि सपा का काम केवल सदन में हंगामा करना और कार्यवाही बाधित करना रह गया है तो उसे अपना नाम बदलकर ‘हल्ला-गुल्ला पार्टी’ रख लेना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष विकास के मुद्दों पर चर्चा से बचकर केवल राजनीतिक नौटंकी कर रहा है।

उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को जारी बयान में विधानसभा की कार्यवाही के दौरान समाजवादी पार्टी के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने और रचनात्मक आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन सदन की कार्यवाही में लगातार बाधा डालना लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय मर्यादाओं के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का आचरण प्रदेश की जनता के जनादेश और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान की भावना के अनुरूप नहीं है। यदि उसका उद्देश्य केवल हंगामा करना और सदन की कार्यवाही बाधित करना है तो उसे अपना नाम बदलकर ‘हल्ला-गुल्ला पार्टी’ रख लेना चाहिए।

पंकज चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों, युवाओं, महिलाओं, गरीबों, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत ढांचे के विकास को गति देने के उद्देश्य से अनुपूरक बजट पेश किया है। ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर गंभीर चर्चा करने के बजाय समाजवादी पार्टी ने हंगामे का रास्ता चुना, जिससे स्पष्ट होता है कि उसे प्रदेश के विकास से कोई सरोकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को सदन में बहस करने, समस्याओं का समाधान निकालने और सरकार से जवाबदेही तय कराने के लिए चुनती है, न कि नारेबाजी और गतिरोध पैदा करने के लिए। विपक्ष को लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन, जनकल्याण और प्रदेश के सर्वांगीण विकास के एजेंडे पर लगातार काम कर रही है। वहीं समाजवादी पार्टी केवल हंगामे की राजनीति के जरिए अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सब देख रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करने तथा उनका अपमान करने वालों के बीच अंतर भी समझती है।