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स्टेटहुड बहाली की मांग पर जम्मू कश्मीर विधानसभा में टकराव, मार्शलों ने 4 विधायकों को सदन से निकाला

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श्रीनगर, 28 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में स्टेटहुड प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। सदन में स्थिति बिगड़ने के बाद विधानसभा मार्शलों ने भाजपा के विधायक अरविंद गुप्ता और विक्रम रंधावा तथा कांग्रेस के विधायक एडवोकेट इरफान हफीज लोन और इफ्तिखार अहमद को सदन से बाहर कर दिया।

हंगामे के बाद कांग्रेस विधायक इफ्तिखार अहमद ने आरोप लगाया कि स्टेटहुड प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक लगातार व्यवधान पैदा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट्ट प्रस्ताव पर बोल रहे थे, उस समय भाजपा विधायकों ने विरोध करना शुरू कर दिया।

इफ्तिखार अहमद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस विधायकों ने भाजपा सदस्यों को प्रधानमंत्री मोदी की ओर से जम्मू-कश्मीर को स्टेटहुड देने के वादे की याद दिलाई।

उन्होंने कहा कि इस दौरान 15 लाख रुपए, दो करोड़ नौकरियों और वोट चोरी तथा चंदा चोरी जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया गया, जिसके बाद भाजपा विधायक नाराज हो गए।

कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायकों ने उनके प्लेकार्ड छीनने की कोशिश की। सदन में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी सदस्य से प्लेकार्ड छीनने या उसकी सीट तक पहुंचकर इस तरह का व्यवहार करने का अधिकार किसी को नहीं है।

इफ्तिखार अहमद ने कहा कि हंगामे के दौरान भाजपा के विधायकों को मार्शल आउट किया गया, लेकिन कांग्रेस के सदस्यों को भी सदन से बाहर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक अपनी सीट पर खड़े होकर अपनी बात रख रहे थे।

इफ्तिखार अहमद ने भाजपा विधायकों से सवाल किया कि क्या उन्हें जम्मू-कश्मीर का स्टेटहुड नहीं चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के उन बयानों का हवाला दिया, जिनमें परिसीमन, विधानसभा चुनाव और उसके बाद स्टेटहुड बहाल करने की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल किया कि सरकार की ओर से स्टेटहुड के लिए जिस “सही समय” की बात कही जा रही है, वह सही समय आखिर कब आएगा।

कांग्रेस विधायक ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग अपने संसाधनों, नौकरियों और जमीन पर अपने अधिकार की मांग करते हैं तो उन्हें देशद्रोही कहा जाता है। अगर देश के अन्य राज्यों के लोग अपने संसाधनों और जमीन की सुरक्षा की मांग करते हैं तो उन्हें अलग नजरिए से क्यों देखा जाता है।

उन्होंने उत्तराखंड में जमीन से जुड़े कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

विधायक ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पहले विशेष दर्जा प्राप्त था और यह महाराजा की रियासत रही है। उनके मुताबिक, राज्य का दर्जा खत्म कर उसे केंद्रशासित प्रदेश में बदल दिया गया। उन्होंने कहा कि जब जम्मू-कश्मीर के लोग अपना अधिकार मांगते हैं, तो इसमें गलत क्या है।