स्थानीय निकाय चुनावों की हलचल से टीवीके की ओर झुकाव बढ़ा, इन दलों के नेता बदलने लगे पाला

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चेन्नई, 17 मई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा को लेकर बढ़ती उम्मीदों के बीच, सत्ताधारी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) में द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) दोनों पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं का आना बढ़ गया है।

राजनीतिक जानकारों और पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना ​​है कि यह रुझान विधानसभा चुनावों में टीवीके के तेजी से उभरने के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों को दिखाता है। दो प्रमुख विपक्षी पार्टियों के सूत्रों ने बताया कि हाल के हफ्तों में स्थानीय नेताओं का सत्ताधारी पार्टी की ओर जाना एक बढ़ती चिंता बन गया है।

कई जाने-माने नेता पहले ही सत्ताधारी पार्टी में शामिल हो चुके हैं। हाल ही में टीवीके में शामिल होने वालों में डीएमके के राज्यस्तरीय पदाधिकारी इरोड जिले के एल्लापलयम आर. शिवकुमार, नामक्कल पूर्वी जिले के कोषाध्यक्ष ए.के. बालाचंदर और रासीपुरम नगर पालिका के पूर्व पार्षद रामकुमार और गेट थंगावेल शामिल हैं। एआईएडीएमके की ओर से पूर्व मंत्री केवी. रामलिंगम भी वरिष्ठ मंत्री केए. सेंगोत्तैयन की मौजूदगी में टीवीके में शामिल हो गए।

राजनीतिक सूत्रों का मानना ​​है कि ये दलबदल एक बड़े बदलाव की सिर्फ शुरुआत हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि दक्षिणी, पश्चिमी और मध्य जिलों के पदाधिकारी भी इसी तरह के कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं। उन्हें टीवीके की बढ़ती सांगठनिक ताकत और इस धारणा से प्रोत्साहन मिल रहा है कि सत्ता संभालने के बाद भी पार्टी का राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

माना जा रहा है कि आगामी दिनों में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव बदलते राजनीतिक समीकरणों के पीछे एक बड़ा कारण हैं। जमीनी स्तर के नेता अपनी राजनीतिक संभावनाओं का फिर से आकलन कर रहे हैं क्योंकि यह आम धारणा बन रही है कि टीवीके नगर पालिका और स्थानीय स्तर के चुनावों में भी विधानसभा चुनावों जैसा ही प्रदर्शन दोहरा सकती है।

एक सूत्र ने बताया कि कई स्थानीय नेताओं में यह भावना है कि अगर चुनाव तुरंत घोषित होते हैं, तो सत्ताधारी पार्टी स्थानीय स्तर पर भी विधानसभा चुनावों वाली सफलता दोहरा सकती है। यही धारणा कई कार्यकर्ताओं को टीवीके की ओर खींच रही है।

हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और बाद में कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई(एम), वीसीके और अन्य दलों के समर्थन से सरकार बनाई।