Thursday, July 16, 2026
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तीसरी बार पुलिस की वर्दी पहनना मेरे लिए सौभाग्य की बात, रानी मुखर्जी ने महिला अफसरों के संघर्ष को सराहा

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मुंबई, 30 जनवरी (आईएएनएस)। रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’ शुक्रवार को रिलीज हो गई। इस फिल्म का इंतजार फैंस बेसब्री से कर रहे थे। यह फिल्म महिला सशक्तिकरण को खूबसूरती से सामने रखती है और सोचने पर मजबूर करती है कि वर्दी पहने महिला किस तरह हर दिन अपराध, डर और दबाव से जूझती है। ‘मर्दानी 3’ में रानी मुखर्जी शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में एक बार फिर लौट रही हैं। इस कड़ी में दिल्ली पुलिस की महिला अधिकारियों के साथ एक सेशन में आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने अनुभव को साझा किया।

आईएएनएस से बात करते हुए रानी मुखर्जी ने कहा, ”तीसरी बार पुलिस की वर्दी पहनना मेरे लिए बड़े सौभाग्य और सम्मान की बात है। महिला पुलिस अधिकारियों की जिंदगी बेहद कठिन होती है। उनके अपने संघर्ष होते हैं, उनकी अपनी कहानियां होती हैं, और रोजमर्रा की जिंदगी में उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद जिस तरह वे अपराध के मामलों को सुलझाती हैं, वह असाधारण है।”

रानी ने कहा, ”शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार के जरिए मैं दुनिया को यह दिखाने की कोशिश कर रही हूं कि भारतीय महिला अधिकारी दिन-रात किस तरह अपने कर्तव्यों को निभाती हैं और समाज की सुरक्षा के लिए लगातार काम करती हैं।”

सेशल में एक महिला पुलिसकर्मी ने रानी से जब सवाल पूछा कि क्या उन्हें गुस्सा या निराशाजनक महसूस होती है कि 2026 में भी फिल्मों के जरिए समाज को महिलाओं और बच्चों के मुद्दों के बारे में सिखाने की जरूरत पड़ रही है?

इस पर रानी ने कहा, “गुस्सा या हताशा महसूस करने से ज्यादा जरूरी यह देखना है कि हालात सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। आज देश में निर्भया स्क्वॉड, दामिनी स्क्वॉड और कई तरह की हेल्पलाइन सेवाएं शुरू की गई हैं, जो महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए एक सकारात्मक पहल हैं। ये सभी प्रयास यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहे हैं कि हर लड़की और हर बच्चे को जरूरत पड़ने पर मदद मिल सके।”

उन्होंने कहा, ”संघर्ष हर इंसान की जिंदगी का हिस्सा है और यह समस्या सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की है। महिलाओं की सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा आज हर देश के सामने एक बड़ी चुनौती है।”

रानी ने कहा, ”हमें इन सकारात्मक कदमों को देखकर एक बेहतर भविष्य की उम्मीद करनी चाहिए। बदलाव एक दिन में नहीं आता, लेकिन सही दिशा में उठाए गए कदम धीरे-धीरे समाज को सुरक्षित बनाते हैं।”