कोलकाता, 12 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्यमंत्री सुकांत मजूमदार ने टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह विचाधारा पर आधारित पार्टी नहीं है। टीएमसी डूबती हुई नाव है, जिससे उसके सहयोगी की छोड़कर भाग रहे हैं।
कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान सुकांत मजूमदार ने कहा कि मुझे लगता है कि आने वाले समय में टीएमसी की ओर से कोई बड़ी चुनौती नहीं मिलेगी. क्योंकि टीएमसी किसी विचारधारा पर आधारित पार्टी नहीं है। यह मुख्य रूप से ममता बनर्जी की पार्टी है। ज्यादातर विधायक और सांसद ममता बनर्जी के साथ नहीं हैं। यहां सत्ता का केंद्र एक तरफ है और बाकी पार्टी दूसरी तरफ। रितब्रत बनर्जी इस स्थिति में कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि बात बन नहीं पा रही है।
यूसीसी का जिक्र करते हुए मजूमदार ने कहा कि बंगाल सरकार पहले ही यूसीसी से जुड़े प्रावधान लागू कर चुकी है। आने वाले समय में यहां इस तरह के बिल पर चर्चा होगी और हम इसके लिए प्रतिबद्ध हैं क्योंकि हमारे घोषणापत्र, जिसे हमने यहां ‘भरोसा पत्र’ कहा है, उसमें हमने साफ तौर पर कहा था कि हम यूसीसी लागू करेंगे।
एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल पर सुकांत मजूमदार ने कहा कि एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल पुलिस को किसी बड़ी घटना के होने से पहले ही एहतियातन गिरफ्तारी करने की शक्ति देता है। हिंसा और दंगों में कई आपराधिक तत्व शामिल होते हैं। अगर पुलिस ऐसे लोगों को हिरासत में ले सकती है, तो इससे दंगों को रोकने और शांति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
बंगाल में मदरसों के सर्वे को लेकर मजूमदार ने कहा कि सरकार को ऐसा करना चाहिए। यह बहुत अच्छा फैसला है, क्योंकि बहुत पहले, जब बुद्धदेव भट्टाचार्य मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने कहा था कि बॉर्डर के पास ऐसे अनधिकृत मदरसे हैं जो देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। बाद में पार्टी के दबाव और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण उन्हें अपना बयान वापस लेना पड़ा। अगर उस समय स्थिति ऐसी थी तो आज यह और भी बड़ी हो गई है और शायद और बढ़ गई है।
एयरपोर्ट से मस्जिद को हटाए जाने पर मजूमदार ने कहा कि यह बात काफी समय से पता है। जब मैं छात्र था, तब अखबारों में पढ़ता था कि दमदम एयरपोर्ट पर एक मस्जिद है, जिसकी वजह से एयरपोर्ट के रनवे का विस्तार नहीं हो पा रहा था। उस समय तुष्टिकरण की राजनीति के कारण किसी भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। अब हमारी सरकार बनी है और हमारी सरकार तुष्टिकरण की राजनीति में विश्वास नहीं करती है। मस्जिद दूसरी जगह बनाई जाएगी, तो इसमें क्या बड़ी बात है और क्या दिक्कत है।

