ट्रंप का आरोप: ओबामा की नीतियों से ईरान हुआ मजबूत, विमान से तेहरान भेजे गए अरबों डॉलर

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नई द‍िल्‍ली, 11 मई (आईएएनएस)। अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप ने एक बार फ‍िर ईरान की नीत‍ि और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की कार्यशैली पर बड़ा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए।

ट्रंप ने आरोप लगाया कि ओबामा सरकार की नीतियों ने ईरान को आर्थिक और राजनीतिक तौर पर मजबूत किया, जबकि ईरान वर्षों से अमेरिका को धोखा देता आ रहा है।

डोनाल्‍ड ट्रंप ने अपने सोशल मीड‍िया अकाउंट ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्‍ट क‍िया, ”ईरान पिछले 47 वर्षों से अमेरिका और बाकी दुनिया के साथ खेल खेलता आ रहा है। हर बार बस टालमटोल करता रहा, ‘आज नहीं, कल’ वाली नीति अपनाता रहा। फिर उसे सबसे बड़ा मौका तब मिला, जब बराक हुसैन ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बने। ओबामा सिर्फ ईरान के प्रति नरम नहीं थे, बल्कि पूरी तरह उनके पक्ष में चले गए। उन्होंने इजरायल और दूसरे सहयोगी देशों को नजरअंदाज कर दिया और ईरान को फिर से मजबूत होने का बड़ा मौका दे दिया।”

ट्रंप दावा क‍िया क‍ि ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर दिए गए और 1.7 अरब डॉलर नकद हरे नोट विमान से तेहरान भेजे गए। ट्रंप ने दावा किया कि वॉशिंगटन डीसी, वर्जीनिया और मैरीलैंड के बैंकों से इतना पैसा निकाला गया कि ईरानी नेताओं को समझ ही नहीं आया कि उसका क्या करें। यह पैसा सूटकेस और बैगों में भरकर विमान से उतारा गया। ईरानी हैरान थे कि उन्हें इतनी बड़ी रकम मिल गई।

ट्रंप ने ओबामा को ‘कमजोर और बेवकूफ राष्ट्रपति’ बताते हुए कहा कि ईरान को आखिरकार ऐसा नेता मिल गया जिसे वे आसानी से इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने आगे कहा कि ओबामा अमेरिका के नेता के तौर पर खराब थे, लेकिन ‘स्लीपी जो बाइडेन’ जितने नहीं।

ट्रंप ने आरोप लगाया कि पिछले 47 वर्षों में ईरान अमेरिका को लगातार उलझाता रहा है। सड़क किनारे बम धमाकों में अमेरिकी लोगों की जान लेता रहा है। हाल ही में 42,000 निर्दोष और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मार डाला। ट्रंप ने कहा कि ईरान अब अमेरिका पर हंस नहीं पाएगा, क्योंकि देश फिर से ‘महान’ बन रहा है।

ट्रंप का यह बयान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के उस बयान के बाद आया, ज‍िसमें उन्‍होंने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को उसकी कमजोरी न समझने की हिदायत दी।

रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में पेजेश्कियन ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “हम दुश्मन के सामने सिर नहीं झुकाएंगे। अगर बातचीत या मोलभाव की बात उठती है, तो इसका मतलब सरेंडर (आत्मसमर्पण) या पीछे हटना नहीं है। बल्कि, इसका मकसद ईरान के अधिकारों को बनाए रखना और पूरी मजबूती के साथ राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।”