वॉशिंगटन/तेहरान, 23 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच प्रस्तावित सिविल न्यूक्लियर डील पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि सऊदी अरब अब्राहम समझौते में शामिल होता है या नहीं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “अमेरिका असैन्य परमाणु सुविधाओं का विरोध नहीं करता और प्रस्तावित समझौता केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होगा। यह वही मॉडल है, जैसा ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अन्य देशों के पास पहले से मौजूद है।”
प्रस्तावित समझौते के तहत सऊदी अरब को अमेरिकी तकनीक की मदद से परमाणु रिएक्टर बनाने और यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिलेगी। हालांकि, इस समझौते में संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) द्वारा अचानक निरीक्षण की वह शर्त शामिल नहीं है, जिसे अमेरिका पहले ईरान के मामले में जरूरी मानता रहा है।
यह परमाणु समझौता ट्रंप के पहले कार्यकाल और पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन के दौरान भी चर्चा में रहा था।
विशेषज्ञों के अनुसार, यूरेनियम संवर्धन और परमाणु अपशिष्ट के पुनर्प्रसंस्करण जैसी तकनीकों का इस्तेमाल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के साथ-साथ परमाणु हथियार बनाने की दिशा में भी किया जा सकता है। वर्ष 2009 में अमेरिका के साथ हुए समझौते में यूएई ने इन दोनों गतिविधियों को छोड़ने पर सहमति दी थी।
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने अमेरिकी सैनिकों को नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले से जुड़े आदेशों का पालन न करने की चेतावनी दी।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि “किसी के लिए भी युद्ध अपराध मत कीजिए। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश का हवाला देकर युद्ध अपराधों की जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।”
बाघेई ने कहा कि नागरिक ठिकानों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है और ऐसे मामलों में केवल आदेश मिलने का तर्क कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता।

