भोपाल, 22 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में मॉडल और एक्टर ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में अब एक बड़ा कानूनी कदम उठाया गया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने ट्विशा शर्मा के पति और आरोपी वकील समर्थ सिंह का वकालत करने का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
अब समर्थ सिंह फिलहाल किसी भी अदालत में वकालतनामा दाखिल नहीं कर सकेंगे और न ही किसी कोर्ट, ट्रिब्यूनल या कानूनी मंच पर प्रैक्टिस कर पाएंगे।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से शुक्रवार को जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि यह मामला ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़ा है, जिनकी शादी के कुछ ही महीनों बाद भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
बार काउंसिल ने कहा कि उसके संज्ञान में यह बात लाई गई है कि समर्थ सिंह और अन्य लोगों के खिलाफ दहेज मृत्यु, क्रूरता और संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। परिषद को यह भी जानकारी मिली कि समर्थ सिंह, जो मृतका के पति हैं, फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपने आदेश में कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं और इनका सीधा असर कानूनी पेशे की गरिमा, अनुशासन और सार्वजनिक छवि पर पड़ता है। परिषद ने कहा कि एक वकील केवल निजी व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह अदालत का अधिकारी और एक नियंत्रित पेशे का सदस्य होता है। ऐसे में बार काउंसिल की जिम्मेदारी है कि वह पेशे की शुचिता बनाए रखे और यह सुनिश्चित करे कि किसी वकील का आचरण न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास को कमजोर न करे।
परिषद ने कहा कि मामले की गंभीरता, पत्नी की मौत में वकील की कथित भूमिका, आपराधिक केस दर्ज होने और आरोपी के फरार होने जैसी परिस्थितियों को देखते हुए तत्काल अंतरिम आदेश जारी करना जरूरी हो गया था।
इसी के तहत समर्थ सिंह को अगले आदेश तक वकालत करने से निलंबित कर दिया गया है। आदेश में साफ कहा गया है कि निलंबन की अवधि के दौरान समर्थ सिंह किसी भी अदालत, ट्रिब्यूनल, अथॉरिटी या अन्य कानूनी मंच पर पेश नहीं हो सकेंगे, न ही किसी मामले में पैरवी कर पाएंगे।
बार काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया कि यह एक अंतरिम आदेश है और मामले को आगे उचित अनुशासनात्मक समिति या सक्षम वैधानिक निकाय के सामने रखा जाएगा। वहां कानून के अनुसार आगे सुनवाई होगी और जरूरत पड़ने पर आदेश में बदलाव, पुष्टि या अन्य निर्णय लिया जाएगा।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने इस आदेश को कानूनी पेशे की गरिमा और अनुशासन बनाए रखने के हित में उठाया गया जरूरी कदम बताया है।

