Thursday, July 16, 2026
SGSU Advertisement
Home राजनीति यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट की रोक स्वागतयोग्य, सरकार को...

यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट की रोक स्वागतयोग्य, सरकार को फटकार: आनंद दुबे

0
31

नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को नोटिस जारी किया और यूजीसी के नए रेगुलेशन पर रोक लगा दी है। अब इसको लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया और इसे केंद्र सरकार की हार बताया।

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “हम सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं, जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों की आवाज सुनी। जो आवाज केंद्र सरकार को सुननी चाहिए थी, उसे सुप्रीम कोर्ट सुन रहा है। केंद्र सरकार ने यूजीसी में जो नए नियम लाए हैं, उनमें कुछ असमानता है। उनमें कुछ अन्यायप्रारक शब्द हैं। जैसे अगर किसी असामान्य वर्ग के विद्यार्थी ने किसी सामान्य वर्ग के विद्यार्थी पर कोई आरोप लगाया और वह आरोप बाद में झूठा दिखा तो सामान्य वर्ग का विद्यार्थी बाद में उस विद्यार्थी पर कोई केस भी नहीं कर सकता। उसमें सजा भी नहीं दिलवा सकता। यह बहुत ही गलत है।”

उन्होंने कहा, “एक तरफ केंद्र सरकार कह रही है कि वह भेदभाव मिटाना चाहती है, इसलिए यूजीसी में कुछ बदलाव किए हैं। वरना यूजीसी में 2012 के जो नियम हैं, वे बहुत अच्छे से तो चल ही रहे थे। सरकार ने जो नया नियम लाया, उस नियम का अर्थ क्या निकला? मामला जब कोर्ट-कचहरी में गया, सभी जानते हैं कि जब किसी मामले में तथ्य नहीं होता तो सुप्रीम कोर्ट उसे खारिज कर देता है। यह केंद्र सरकार की बहुत बड़ी हार है।”

आनंद दुबे ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया, मामले की सुनवाई करवाई और तुरंत तत्काल प्रभाव से इस मामले में स्टे दिया और कहा कि 2012 का नियम ही लागू होगा। अगली सुनवाई 19 मार्च को है। इससे विद्यार्थियों और उनके परिवार को राहत मिल गई। विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके परिजन भी घबराए हुए थे कि अगर बच्चों के साथ कुछ भेदभाव होगा, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। जो बच्चे कॉलेज में पढ़ाई करके अपना भविष्य बढ़ाना चाहते हैं, वे छोटे-मोटे विवादों में फंस जाएंगे।”

शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता ने आगे कहा, “यूजीसी मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बहुत ही स्वागतयोग्य है, जिसमें केंद्र सरकार को फटकार लगी है। धर्मेंद्र प्रधान के मंत्रालय को एक प्रकार से निराशा हाथ लगी है। यह काला कानून है। आने वाले समय में हम उम्मीद करते हैं कि इसे खारिज कर दिया जाएगा। इससे पहले के कानून में सभी चीज सामान्य है। कोई बड़ा नहीं और कोई छोटा नहीं, कानून की नजर में सभी बराबर होने चाहिए। हम लोग डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान को मानने वाले लोग हैं, लेकिन केंद्र की सरकार उस संविधान को हटाना चाहती है।”