Thursday, July 23, 2026
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‘उनकी चिंताएं और सरोकार वास्तविक हैं’, दिल्ली में सीजेपी आंदोलन पर मुरली मनोहर जोशी का बयान

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नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन जारी है। इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने प्रदर्शनकारियों की मांगों को उचित बताया है और सरकार से उनके खिलाफ कार्रवाई न करने की अपील की है।

भाजपा नेता ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट भी शेयर किया। जोशी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह देखना अत्यन्त पीड़ादायक है कि देश के विभिन्न भागों से आए युवा छात्र कई दिनों से नई दिल्ली की सड़कों पर एकत्रित हैं। उनकी चिंताएं और सरोकार वास्तविक हैं। इन्हें सहानुभूति तथा दूरगामी समाधान की दृष्टि से हल किया जाना चाहिए। मुझे पूरी आशा है कि इसे केवल कानूनी और व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं देखा जाएगा, जिससे बलपूर्वक निपटा जाए।

उन्होंने कहा कि मुझे यह देखकर अत्यन्त पीड़ा हुई है कि महिलाओं और युवतियों पर निर्मम बल प्रयोग किया गया। ऐसे बल के उपयोग से भारतीय समाज का बड़ा हिस्सा विकसित भारत के लक्ष्य से बहुत दूर चला जाएगा।

वहीं, दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को उन खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि उसे राष्ट्रीय राजधानी में पेपर लीक को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत अधिकार दिए गए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह आदेश एक सामान्य प्रशासनिक नवीनीकरण (रिन्यूअल) है, जो वर्षों से लागू है।

गौरतलब है कि दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) ने 15 जुलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए), 1980 की धारा 3(3) के तहत एक आदेश जारी किया था। इस आदेश ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को 19 जुलाई, 2026 से 18 अक्टूबर, 2026 तक एनएसए के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करने का अधिकार दिया।

इसका मतलब है कि इस अवधि के दौरान, दिल्ली पुलिस कमिश्नर एनएसए की धारा 3(2) के तहत उन व्यक्तियों के खिलाफ निवारक हिरासत (प्रिवेंटिव डिटेंशन) के आदेश जारी कर सकते हैं, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के हित में हिरासत में लेना आवश्यक समझा जाए।

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह कोई नया आदेश नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि यह लंबे समय से लागू है और मानक प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हर तीन महीने में इसका नवीनीकरण किया जाता है।