Thursday, July 16, 2026
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महिला सड़क पर चले तो उसके साथ चेन स्नैचिंग की वारदात हो जाती है: माता प्रसाद पांडे

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लखनऊ, 13 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के विधानसभा बजट सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था पर सरकार की पीठ-थपथपाई। इस पर विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने ऐसा कोई जवाब नहीं दिया, जिससे कोई संतुष्ट हो सके।

माता प्रसाद पांडे ने आईएएनएस से बातचीत में प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था ऐसी है कि अगर कोई महिला सड़क पर चले तो उसके साथ चेन स्नैचिंग की वारदात हो जाती है।

उन्होंने लोकायुक्त रिपोर्ट के बारे में भी कुछ नहीं बताया- चाहे वह आई हो या नहीं। हमने कहा कि अगर लोकायुक्त की रिपोर्ट आई है, तो वह कहां है, यह नहीं बताया गया।

नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने विधानसभा में बजट सत्र के दौरान अपनी बात रखते हुए कहा कि 262 एनकाउंटर हुए हैं। ठीक है, क्रिमिनल्स का एनकाउंटर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 262 एनकाउंटर हुए हैं। एनकाउंटर की प्रथा हमारे संविधान में नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे शुरू किया। आने वाली सरकारें इसे चलाएंगी या नहीं, मुझे नहीं पता, लेकिन अगर आगे की सरकारें इसे नहीं चलाती हैं तो आपको भी मालूम होगा कि यह गलत फैसला था।

माता प्रसाद पांडे ने कहा कि आजकल ज्यादातर लोग भ्रष्टाचार से परेशान हैं, लेकिन इस पर शायद ही कोई चर्चा हुई है- चाहे वह तहसील स्तर पर भ्रष्टाचार हो या कहीं और। इस मुद्दे पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है, जबकि पूरा प्रदेश-किसान हो या गांव का रहने वाला, भ्रष्टाचार से पीड़ित है।

समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र शंकराचार्य के बारे में गलत भाषा का इस्तेमाल किया। वे 11 दिन से धरने पर रहे, और किसी ने बात नहीं की।

कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि वंदे मातरम का कांग्रेस पार्टी ने हमेशा सम्मान किया है। पहले भी सम्मान था, आगे भी रहेगा।

उन्होंने विधानसभा बजट सत्र के पांचवें दिन नियम 56 के अंतर्गत प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और सड़क सुरक्षा की गंभीर स्थिति का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क सुरक्षा की वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है और यह केवल मानवीय भूल का विषय नहीं, बल्कि व्यवस्थागत सुधार की मांग करता है।