लखनऊ, 10 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एसिड अटैक पीड़ितों को प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने और आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ने के प्रस्ताव का एसिड अटैक सर्वाइवर्स ने स्वागत किया है। पीड़ितों का कहना है कि यह कदम उनके पुनर्वास और बेहतर जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, हालांकि उन्होंने सरकार से कानून को और सख्त बनाने तथा बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की।
लखनऊ की रहने वाली एसिड अटैक सर्वाइवर कुंती ने सरकार के फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि लंबे समय बाद सरकार ने उनके बारे में गंभीरता से सोचा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद करते हुए कहा कि एसिड अटैक के बाद अधिकांश लड़कियों की जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। कई बार उन्हें अपना घर तक छोड़ना पड़ता है और समाज में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आवास की सुविधा उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी।
कुंती ने कहा कि सरकार की इस घोषणा को जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जाना चाहिए ताकि पीड़ितों को वास्तविक लाभ मिल सके। उन्होंने बेहतर इलाज की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि एसिड अटैक के घाव केवल शरीर पर नहीं बल्कि पूरी जिंदगी पर असर डालते हैं। उन्होंने कहा कि आज भी वह एक आंख से बहुत कम देख पाती हैं और जीवनभर इस संघर्ष के साथ जीना होगा।
उन्होंने एसिड अटैक के मामलों में सजा को और कठोर बनाने की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान कानून पर्याप्त प्रभावी नहीं है। उनका मानना है कि अपराधियों में कानून का भय पैदा होना चाहिए ताकि कोई भी व्यक्ति एसिड खरीदने या हमला करने की हिम्मत न कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि एसिड की बिक्री पर प्रतिबंध होने के बावजूद कई स्थानों पर यह आसानी से उपलब्ध है, जिसे रोकने के लिए सरकार को गंभीर कदम उठाने चाहिए।
एक अन्य सर्वाइवर आसमां ने भी सरकार के फैसले का स्वागत किया लेकिन कहा कि केवल आवास और स्वास्थ्य सुविधा ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने बताया कि देश में आज भी एसिड अटैक की घटनाएं सामने आ रही हैं और कई पीड़ितों को समय पर तथा गुणवत्तापूर्ण इलाज नहीं मिल पाता, जिसके कारण उनकी जान तक चली जाती है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में दोषियों को सजा मिलने के बावजूद अपील के दौरान जमानत मिल जाती है, जिससे पीड़ितों को मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है।
आसमां ने सरकार से मांग की कि एसिड हमलों के लिए सजा को और सख्त किया जाए तथा एसिड की बिक्री पर पूरी तरह प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि हमले के बाद अपराधी सामान्य जीवन जीने लगते हैं, जबकि पीड़िता को जीवनभर शारीरिक और मानसिक संघर्ष झेलना पड़ता है।
लखनऊ की एक अन्य सर्वाइवर ज्योति ने कहा कि सरकार द्वारा आवास और चिकित्सा सुविधा देने का निर्णय सराहनीय है, लेकिन इसके साथ-साथ विशेष चिकित्सा केंद्रों की स्थापना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई गंभीर मामलों में मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली जैसे बड़े शहरों में ले जाना पड़ता है, जो आर्थिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन होता है। यदि प्रदेश में ही उच्चस्तरीय उपचार की व्यवस्था हो तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
ज्योति ने कहा कि एसिड की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार केवल महिला पीड़ितों ही नहीं, बल्कि पुरुष एसिड अटैक और बर्न सर्वाइवर्स के पुनर्वास और सहायता पर भी ध्यान दे।

