रांची, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेता राकेश सिन्हा ने दिल्ली में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर तीखी टिप्पणी की। साथ ही उन्होंने बंगाल और असम के हालिया उपचुनाव परिणामों को लेकर भी चुनाव आयोग और प्रशासन की भूमिका पर निशाना साधा।
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा, “बंगाल और असम के चुनाव में तो चुनाव आयोग ने पहले ही जीत तय कर दी थी। बंगाल में कैसे अहम मौके पर टीएमसी का सिंबल फ्रीज कर दिया गया और कांग्रेस के प्रत्याशी को उस केस में जेल में डाल दिया गया, जिस केस में बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी लिप्त थे। वो नंदीग्राम आंदोलन का केस था। एक केस में दो निर्णय-एक निर्णय कि कांग्रेस के प्रत्याशी को जेल में डालो और दूसरा सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाओ।”
उन्होंने कहा कि जब चुनाव आयोग ने यह निर्णय किया तो यह तय था कि चुनाव आयोग जिताएगा भी। बंगाल का पूरा प्रशासन लगा हुआ था। असम और बंगाल के चुनावों में धन, बल, चुनाव आयोग, तमाम चीजों का उपयोग किया गया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जब सारी संवैधानिक संस्थाएं लग जाएं और पुलिस लग जाएं तो जीत तो हो ही जाती है। ये उपचुनाव है, जीतकर खुशी मना लें। आम चुनाव में तो फिर ये दो पर आ जाएंगे, ये तय हो चुका है।
दिल्ली के सीपी प्रोटेस्ट को लेकर उन्होंने कहा कि मतलब देश की सत्ता इतनी कमजोर, इतनी डरी हुई है आज तक हमने नहीं देखी। देश की सत्ता अपने ही देश के युवाओं से डर जाए। अपने देश के छात्रों से डर जाए। कैसी सत्ता है भाई, जो अपने देश के युवाओं से डर रही है, जो अपने देश के किसानों से डरती है? आखिर ये डरने वाली सरकार है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि ये आजाद भारत में पहली सरकार ऐसी है जो बिल्कुल सहमी हुई है। डरी हुई है, क्योंकि इनकी चोरी पकड़ी गई। जब चोरी पकड़ी जाए और चोरों का पैमाना बड़ा हो तो चोर अंदर से तो डरे रहते हैं, लेकिन बाहर से वो डराने का प्रयास करते हैं। यही काम अभी केंद्र सरकार कर रही है।
राकेश कुमार ने कहा कि सरकार इतनी घबरा गई है। हम यह कह सकते हैं कि क्या भारत में सरकार को क्या लग रहा है, जिस प्रकार जम्मू-कश्मीर से पैरामिलिट्री को बुला लिया गया, डिटेन कर लिया जा रहा है, मेट्रो स्टेशन बंद कर दिया जा रहा है। मतलब लग रहा है कि कोई बहुत बड़ा आतंकी हमला हो रहा है। आतंकी हमले तो रोक नहीं पा रहे हैं देश के प्रधानमंत्री, लेकिन अपने देश के युवाओं से, अपने देश के छात्रों से, और अपने देश के किसानों से यह सरकार कितनी डर गई है, और यही मकसद है कि सरकार डर जाए।
उन्होंने कहा कि चूंकि सरकार डरी हुई है, तो अब यह तय हो गया है कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा होगा, जैसे धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ था।
