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उत्कृष्ट वैज्ञानिक श्रीहरि को आरसीआई, डीआरडीओ हैदराबाद का निदेशक नियुक्त किया गया

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नई दिल्ली, 15 सितंबर (आईएएनएस)। उत्कृष्ट वैज्ञानिक डॉ. पी. श्रीहरि को अनुसंधान केंद्र इमारत (आरसीआई), डीआरडीओ हैदराबाद का निदेशक नियुक्त किया गया है और उन्होंने 15 सितंबर 2026 को कार्यभार ग्रहण किया।

डॉ. पी. श्रीहरि ने 1990 में नागार्जुन विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक, कोयंबटूर के पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री और हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग फेलोशिप कोर्स (एमईएफसी) के माध्यम से डीआरडीओ में प्रवेश लिया और अक्टूबर 1992 से भारत के बेंगलुरु स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार विकास प्रतिष्ठान (एलआरडीई) में वैज्ञानिक ‘बी’ के रूप में अपना करियर शुरू किया।

उन्होंने अपने प्रारंभिक दिनों में एलसीए कार्यक्रम के लिए मल्टी-मोड रडार (एमएमआर) पर काम किया। उन्होंने मल्टीलेयर स्लॉटेड ऐरे एंटीना का डिजाइन और विकास किया है। इस तकनीक का उपयोग डीआरडीओ के कई अन्य एंटीना कार्यक्रमों, जैसे एएलएच और बीएफएसआर, में किया गया है। वर्ष 2000 में उन्हें कार्यक्रम एडी के तहत लंबी दूरी के ट्रैकिंग रडार (एलआरटीआर) के लिए आईएआई/ईएलटीए में प्रतिनियुक्त किया गया था। कोलार रडार रेंज के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

दिसंबर 2003 में, वे हैदराबाद स्थित डीआरडीएल में स्थानांतरित हुए और लिक्विड प्रोपल्शन डिवीजन (एलपीडी) में काम करना शुरू किया। उन्होंने भारतीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम के लिए इंटरसेप्टर मिसाइलों हेतु डायवर्ट और एटीट्यूड कंट्रोल सिस्टम (डीएसीएस) का डिजाइन और विकास किया। उनके द्वारा विकसित कोल्ड गैस रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम (आरसीएस) का इंटरसेप्टर परीक्षणों के लिए लक्ष्य मिसाइलों में सफलतापूर्वक उपयोग किया गया।

2015 में, वे कार्यक्रम एडी में शामिल हुए और पीडीवी और एडी सेकेंड इंटरसेप्टर मिसाइलों पर काम किया। वे कोर ग्रुप के उन सदस्यों में से एक थे जिन्होंने मार्च 2019 में लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) उपग्रह को इंटरसेप्ट करके एंटी सैटेलाइट (एएसएटी) कार्यक्रम को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

2019 में, उन्हें डीआरडीओ और आईएआई के संयुक्त विकास कार्यक्रम, एमआरएसएएम (आईएएफ) परियोजना के लिए परियोजना निदेशक नियुक्त किया गया। उनके नेतृत्व में, पहली फायरिंग यूनिट को अक्टूबर 2021 में भारतीय वायुसेना में सफलतापूर्वक शामिल किया गया। उन्होंने शेष सभी फायरिंग यूनिटों (एफयू) की निर्बाध डिलीवरी के लिए पूरी उत्पादन लाइनें स्थापित कीं।

उन्हें अगस्त 2021 में प्रोग्राम एडी में प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया था और 2022 में उन्हें प्रतिष्ठित भारतीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) कार्यक्रम के प्रोग्राम एडी के प्रोग्राम डायरेक्टर के रूप में पदोन्नत किया गया। उनके विशिष्ट योगदान के लिए, उन्हें आत्मनिर्भरता में उत्कृष्टता के लिए अग्नि पुरस्कार, अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए डीआरडीओ पुरस्कार और वर्ष का वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

वे एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एईएसआई) के हैदराबाद चैप्टर के मानद सचिव हैं और हाई एनर्जी मैटेरियल्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (एचईएमएसआई), इंडियन नेशनल सोसाइटी फॉर एयरोस्पेस एंड रिलेटेड मैकेनिज्म (आईएनएसएआरएम) और सोसाइटी ऑफ ऑटोमोटिव इंजीनियर्स (एसएई) जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के सदस्य हैं।

उन्होंने मिसाइल प्रणालियों के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में दस से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं।